नरसिंहपुर। एक तरफ जहाँ लोग अपनों को ही दर-दर की ठोकरें खाने पर मजबूर कर देते हैं। वहीँ दूसरी तरफ प्रदेश की एक युवती ऐसी भी है जिसने अपना सारा जीवन ही बेजुबानों जानवरों के नाम कर दिया है। जानवरों के प्रति दीवानगी ऐसी हैं कि इनकी देखभाल करने के लिए युवती ने अपनी नौकरी भी छोड़ दी है। साथ ही शादी इस काम में बाधा न बने इसलिए युवती ने शादी करने का ख्याल भी मन से निकाल दिया है।
यूँ तो आवारा को कोई दुत्कारता है, कोई मारता है तो कोई पीटता है। न कोई खाना देता है और न ही पानी। लेकिन नरसिंहपुर के रानी लक्ष्मी बाई वार्ड की रहने वाली ऋचा प्रियदर्शनी के घर में कुत्तों को सोने के लिए गद्देदार बिस्तर मिलता है। खाने को बिस्किट और पीने के लिए दूध। ये कूलर की ठंडी हवा में सोते है और टीवी देखने का लुत्फ़ भी लेते है।
ऋचा प्रियदर्शनी ने एम्ए एलएलबी तक पढ़ाई की है। ऋचा को जानवरों से बड़ा प्यार है, खासकर कुत्तों से। ऋचा को रास्ते में जब भी कोई लाचार, बीमार या परेशान कुत्ता मिलता है वह उसे अपने घर ले आती है। उसका इलाज करवाती है और उसकी अच्छे से देखभाल करती है। जब वह पूरी तरह से ठीक हो जाती है तो उसे वापस छोड़ देती है। इस बीच जो यहीं रह जाता है वह ऋचा के घर का सदस्य बन जाता है।
इस समय ऋचा के घर आठ कुत्ते है। जिसकी वह बड़े अच्छे से देखभाल करती है। जानवरों के प्रति ऋचा दीवानगी इस हद तक हैं कि कई बार कुत्तों के इलाज के लिए उन्हें अपने जेवर तक बेचना पड़े है। यहाँ तक की समय के अभाव में नौकरी तक छोड़ दी। शादी के लिए रिश्ते आये पर इन्हें छोड़ कर जाने की चिंता ने शादी का ख्याल ही मन से निकाल दिया।
ऋचा को इंसान से ज्यादा उसे उसके ये साथी ज्यादा वफादार लगते है। ऋचा की जिन्दगी तो बस अपने घर के इन प्यारे सदस्यों से शुरू होती है और इन्ही में सिमट कर रह जाती है। वह कहती है उन्हें सिर्फ कुत्तों से ही नहीं बल्कि सभी जानवरों जीव जंतु से प्यार है।
प्रियदर्शनी के पिता इस दुनिया में नहीं है। घर में उसकी मां और वह दोनों ही है। मां केंद्रीय विद्यालय में प्राचार्य थी अब वो भी रिटायर हो गई है। वो शहर की जानी मानी साहित्यकार भी है। अपनी बेटी को लेकर उन्होंने न जाने क्या क्या सपने संजोय थे पर बेटी की इस जिद और जूनून के आगे उसकी एक न चली। शुरू-शुरू में तो उन्होंने विरोध भी किया पर अब बेटी की तरह उन्हें भी अपने घर के ये सदस्य प्यारे लगते हैं।
