विदिशा। विदिशा जिले में एक बार फिर से स्वास्थ्य विभाग का बेहद ही लापरवाह और अमानवीय चेहरा सामने आया है। अब लटेरी में भी नसबंदी ऑपरेशन के बाद महिलाओं को फर्श पर ही लेटाया गया। हाल ही में ग्यारसपुर में भी ऐसी घटना सामने आई थी। घटना सामने आने के बाद सीएमएचओ डॉ केएस अहिरवार ने जाँच के आदेश दिये है।
दरअसल विदिशा जिला मुख्यालय से तकरीबन 90 किलोमीटर दूर लटेरी के स्वास्थ्य केंद्र में महिला नसबंदी शिविर का आयोजन किया गया था। इस दौरान 37 महिलाओं ने नसबंदी का ऑपरेशन कराया था। ऑपरेशन के बाद महिलाओं को फर्श पर लिटा दिया गया। उन महिलाओं को एक बेड तक नसीब नहीं हो सका। ठंड के मौसम में नसबंदी का ऑपरेशन करवाने वाली महिलाओं को संक्रमण फैलने के खतरे को पूरी तरह से नजरअंदाज किया गया।
जहां एक तरफ स्वास्थ्य महकमे द्वारा नसबंदी को लेकर समाज में जागरूकता लाने एवं प्रोत्साहित करने की बातें की जाती है और भारी-भरकम बजट भी जारी किया जाता है। वहीं दूसरी तरफ विदिशा की यह घटना की तस्वीरें स्वास्थ्य विभाग के बेहद लापरवाह रवैये को उजागर करने के साथ-2 शर्मसार भी करती है।
विदिशा के प्रभारी मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ केएस अहिरवार को जब इस गंभीर मामले के बारे में जानकारी दी गई तो उन्होंने कहा कि, ‘वो इस पूरे मामले की जाँच करवाएंगे और दोषियों पर कार्यवाही करेंगे।‘ वहीँ कलेक्टर ने भी मामले की जांच के आदेश जारी कर दिये गए हैं। साथ ही लटेरी बीएमओ डॉ नरेश बघेल को तत्काल प्रभाव से पद से हटा दिया गया है।
एक तरफ कमलनाथ सरकार राइट टू हेल्थ की बात कर रही है, वहीँ दूसरी तरफ स्वास्थ्य विभाग बार-बार उनकी योजना का मखौल उड़ा रहा है। बीते दिनों विदिशा के ग्यारसपुर स्वास्थ्य केंद्र में नसबंदी के ऑपरेशन के बाद 41 महिलाओं को फर्श पर ही लेटा दिया गया था। जिसकी तस्वीरें सामने आने के बाद काफी बवाल हुआ था। लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने इस घटना से सीख लेने की बजाय फिर से वहीँ लापरवाही दोहरा दी।
