बुरहानपुर। इस वर्ष सरकार ने कपास का समर्थन मूल्य पांच हजार 550 रूपए तय किए है। लेकिन कपास उत्पादक किसानों को कपास का यह मूल्य रास नहीं आ रहा है। किसानों ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को चिट्ठी लिखकर कपास का मूल्य 10 हजार रुपए से 12 हजार रुपए किए जाने की गुहार लगाई है। किसानों का कहना है कि अतिवृष्टि के कारण उनकी लागत कई गुना बढ़ गई है। इस कारण यह मूल्य नाकाफी है।
दरअसल महाराष्ट्र सीमावर्ती बुरहानपुर जिले में कपास उत्पादक किसानों के बुरे हाल है। मंडी में कपास की खरीदी शुरू हो गई है। सरकार ने समर्थन मूल्य 5 हजार 550 रूपए तय किए है। लेकिन अधिक बारिश होने के कारण कपास ख़राब हो गई है। इसका फायदा उठाते हुए व्यापारी 3500 रुपये प्रति क्विंटल के भाव से कपास की खरीदी कर रहे हैं।
वहीँ किसानों का कहना है कि साल 2012 में हल्की किस्म की कपास उनके द्वारा 6 हजार रूपए से 7 हजार रूपए प्रति क्विंटल बेची गई थी। अब कीटनाशक दवाओं, खाद, बीज के भाव में कई गुना वृद्धि हो गई है। रही सही कसर अधिक बारिश ने पूरी कर दी। इस कारण कपास की लागत भी कई गुना बढ़ गई। वहीँ कपास का भाव बढ़ने की बजाए घट गया है। किसानों के अनुसार आनुपातिक रूप से कपास के भाव इस साल 10 हजार रूपए से 12 हजार रूपए के बीच होना चाहिए थे।
किसानों के हितों के लिए काम करने वाले संगठन प्रगतिशील किसान संगठन ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को चिट्ठी लिखी है। चिट्ठी में किसान नेताओं ने पीएम मोदी को याद दिलाया आप खेती को लाभ का धंधा बनाना चाहते है। इसके लिए आपने समय सीमा 2022 तय की है। लगातार खाद, बीज, कीटनाशक दवाओं के दामों में वृद्धि और ओलावृष्टि ने किसानों की कमर तोड़ कर रख दी है। किसानों को लागत अधिक, उत्पादन कम और भाव कम मिलने से किसान आत्महत्या जैसे कदम उठाने की कगार पर पहुंच रहे हैं। साथ ही किसानों का कपास की खेती से भी मोह भंग होता जा रहा है।
अगर ऐसा होता है तो देश की अर्थव्यवस्था पर तो असर पड़ेगा साथ ही टेक्सटाइल इंडस्ट्री को कच्चा माल कपास कम और अधिक कीमत में मिलने देश में नया संकट खडा हो जाएगा। लिहाजा किसानों ने पीएम नरेंद्र मोदी से इस मामले में हस्तक्षेप कर कपास का समर्थन मूल्य 10 हजार रूपए से 12 हजार रूपए करने की गुहार लगाई है।
