छिंदवाड़ा। मुख्यमंत्री के गृह जिले में ही स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली का आलम यह है कि जिला अस्पताल में बेड नहीं मिलने के कारण मरीज को जमीन पर ही लेटा दिया गया। साथ ही मरीज की माँ हाथ में ग्लूकोज की बोतल लेकर पास बैठी रही। वहीँ अस्पताल में अपने घायल पति को लेकर पहुंची पत्नी खुद ही स्ट्रेचर खींचते हुए नजर आई। ग्रामीण क्षेत्र में भी जननी वाहन नहीं होने से नवजात की मौत हो गई।
जहाँ एक तरफ सरकार प्रदेश में स्वास्थ्य सुविधाएं बेहतर होने का दावा करती हैं। वहीँ दूसरी तरफ मुख्यमंत्री कमलनाथ के गृह जिले में ही स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति की जो तस्वीरें सामने आई है वह सरकारी दावों की पोल खोलने के लिए काफी है।
पहली तस्वीर जिला अस्पताल की है। यहाँ चौरई के कुरचिढाना से आई एक बुजुर्ग माँ को अपने बेटे के इलाज के लिए बेड तक नसीब नहीं हुआ। ऐसे में बेटे को जमीन पर ही सुला कर ग्लूकोज की बोतल लगा दी। यही नहीं बोतल लगाने के लिए स्टैंड नहीं होने के कारण माँ हाथ में ग्लूकोज की बोतल लेकर जमीन पर ही बैठी रही।
दूसरी तस्वीर भी जिला अस्पताल की ही है। यहाँ अपने घायल पति का इलाज कराने के लिए पहुंची पत्नी को खुद ही स्ट्रेचर खींचना पड़ा। वहीँ एक अन्य तस्वीर जिले के आदिवासी अंचल तामिया के छिंदी के एक ग्राम की है। यहाँ जननी वाहन न मिलने और बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं न होने के चलते नवजात बच्चे की मौत हो गई। वहीँ दूसरे बच्चे का उपचार जिला अस्पताल लाकर करवाया गया।
जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं को बदहाल करती इन तस्वीरों पर जब सीएमएचओ शरद बंसोड़ से उनका पक्ष जाना गया तो उनका कहना था कि स्थिति को बेहतर बनाने प्रयास किये जा रहे हैं।
बता दे कि सीएम कमलनाथ ने जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए जहां एक ओर दिल्ली के एम्स की तर्ज पर सिम्स मेडिकल कॉलेज का निर्माण करवा दिया है। वहीं अब लगभग 1400 करोड़ की लागत से सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल का निर्माण भी किया जा रहा है, जिससे अत्याधुनिक सुविधाओं का लाभ भी जिले के नागरिकों को मिल सकें। सीएम कमलनाथ के इतने प्रयासों के बाद भी जिला का स्वास्थ्य महकमा बिल्कुल भी संवेदनशील नही है। इसी का परिणाम हैं ये तस्वीरें।
