April 29, 2026

भरी बारिश में चुटका परियोजना का विरोध करने पहुँचे सैकड़ों आदिवासी

चुटका (जबलपुर)। तेज़ बारिश और खराब मौसम के बावजूद सैकड़ों की तादात में आदिवासी चुटका गाँव में पहुँचे और उन्होंने चुटका परियोजना को यहाँ से हटाने की पुरजोर मांग रखी। उन्होंने कहा कि सरकारें इस मामले में गुमराह कर रही है। प्रभावित गाँवों के लोगों को जबरन हटाने की साजिश की जा रही है। पंचायत की ग्राम सभाओं में इसका विरोध कर भू अधिग्रहण पर आपत्ति ली है। फिर भी सरकार बिना सहमति आदिवासियों के बैंक खातों में मुआवजे की राशि जमा करवा रही है।

चुटका गाँव में आदिवासी अधिकार हुंकार सम्मेलन में चुटका परमाणु विरोधी संघर्ष समिति, राजा दलपत शाह अभयारण्य विरोधी मोर्चा एवं बरगी बांध विस्थापित-प्रभावित संघ के बैनर तले भारी बारिश के बाद भी लोगों ने बड़ी तादात में हिस्सा लिया। चुटका परमाणु विरोधी संघर्ष समिति के अध्यक्ष दादूलाल कुङापे ने कहा कि सरकार जनता को गुमराह कर रही है कि लोगों ने मुआवजा ले लिया है। जबकि चुटका, कुंडा, टाटीघाट एवं मानेगांव के लोगों ने ग्राम सभा में इस परियोजना का विरोध किया और भू अधिग्रहण की धारा (4) , (9) की नोटिस में लिखित में आपत्ति लगाई है। बाद में सभी आपत्तियों को खारिज करते हुए जबलपुर कमिश्नर ने अवार्ड पारित कर प्रभावितों के बैंक खाते में बगैर किसी सहमति के मुआवजा डलवा दिया। सरकार निजी कम्पनियों के साथ मिलकर आदिवासी समाज को खरीदना चाहती है। हम समाज के साथ अंतिम दम तक इस परियोजना के खिलाफ संघर्ष जारी रखेंगे।

ऊर्जा एवं जलवायु परिवर्तन विशेषज्ञ तथा संयुक्त राष्ट्र संघ में टेक्नालॉजी एंड मैकेनिज्म बोर्ड के सदस्य सौम्या दत्ता ने कहा कि वर्तमान में देश एवं विदेश के ऊर्जा उत्पादन का परिदृश्य बदल गया है, जिसे हमारे नीति निर्धारको को समझने की ज़रूरत है। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के अनुसार भारत के पास 3 लाख 65 हजार मेगावाट की स्थापित क्षमता है, जबकि इस वर्ष जून माह में उच्चतम मांग 1 लाख 85 हजार मेगावाट ही था। 90 हजार मेगावाट क्षमता की विद्युत परियोजना निर्माणाधीन है। वर्तमान केन्द्र सरकार ने 2022 तक 1 लाख 75 हजार मेगावाट अक्षय ऊर्जा निर्माण का लक्ष्य रखा है तो चुटका परियोजना की प्रासंगिकता क्या है? सौर ऊर्जा की कीमत 3 रुपये यूनिट से भी कम आ रही है जबकि परमाणु ऊर्जा की लागत 7 रूपये प्रति यूनिट आएगी। इस महंगी बिजली को कौन खरीदेगा? एनपीसीआईएल को चुटका परियोजना पर जनता के बीच खुली बहस आयोजित करना चाहिए।

भारत जन आंदोलन के विजय भाई ने आदिवासी क्षेत्रों में प्राकृतिक संसाधनों की लूट के खिलाफ आदिवासी समाज को एकजुट होने का आह्वान करते हुए कहा कि अगर आज कदम नहीं उठाया तो कल सभी संसाधन खत्म हो जाएँगे। मध्यप्रदेश किसान महासभा के बादल सरोज ने कहा कि उद्योगपतियों को निवेश के बदले सरकार आदिवासी समाज की जल, जंगल एवं जमीन कंपनियों के लिए गिरवी रख रही है, जो जनता के साथ धोखा है। निवास नगर परिषद के अध्यक्ष चैन सिंह बरकङे ने कहा कि जिस विकास परियोजना को लेकर समाज की सहमति नहीं है, उसे बनने नहीं देना चाहिए. मैं इसको लेकर विधायक एवं जनप्रतिनिधियों से चर्चा करूंगा।

नारायणगंज जनपद पंचायत के उपाध्यक्ष भूपेन्द्र बरकङे ने युवाओं को आह्वान करते हुए कहा कि समाज के साथ होने वाले शोषण के खिलाफ आपको आगे आना होगा अन्यथा हम कंपनियों के बंधुआ मजदूर बनकर रह जाएंगे। चुटका एवं राजा दलपत शाह अभयारण्य परियोजनाओं को सरकार तत्काल रद्द करे। जिला पंचायत सदस्य प्यारी बाई गोठरिया, गुलाब सिंह परसते, ज़िन्दगी बचाओ आंदोलन इंदौर की समारूख धारा, महिला अधिकार मंच की भारती शुक्ला, जन संघर्ष मोर्चा के विवेक पवार, भू अधिकार के अनिल कर्णे, बरगी मछुआरा संघ के मुन्ना बर्मन, राजा दलपत शाह अभयारण्य विरोधी मोर्चा के राजेन्द्र पुटटा, किसान सभा के राम नारायण कुङरिया, मीरा बाई मरावी, सोना बाई, नवरत्न दुबे, नोने लाल कुङापे, अमर सिंह आदि ने भी सम्बोधित किया। कार्यक्रम का संचालन बरगी बांध विस्थापित एवं प्रभावित संघ के राज कुमार सिन्हा ने किया।

Written by XT Correspondent

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