रतलाम। दीपावली के अवसर पर रतलाम के प्रसिद्ध और प्राचीन महालक्ष्मी मंदिर को आकर्षक ढंग से सजाया गया है। सोना-चांदी आभूषण, मोती, हीरे और नकदी की मदद से मंदिर में स्थापित प्रतिमा और पूरे मंदिर को सजाया गया है। महालक्ष्मी मंदिर पर पांच दिवसीय दीपावली उत्सव धन तेरस से शुरू होकर भाईदूज तक चलेगा। मंदिर में राशि रखने के लिए देश के विभिन्न राज्यों के लोग भी यहां पहुचे हैं। मंदिर में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए है।
रतलाम शहर के मानक चौक में वर्षों पुराना देवी महालक्ष्मी का मंदिर है। मंदिर के गर्भगृह में महालक्ष्मी की मूर्ति के साथ सरस्वती और गणेश मूर्ति भी स्थापित है। धन तेरस से 15 दिन पहले ही मंदिर को सजाने की तैयारियां शुरू हो जाती है। ख़ास बात यह है कि मंदिर को सजाने के लिए आभूषण, मोती, हीरे और नकदी श्रद्धालु देते हैं। दीपावली उत्सव के बाद भक्तों को उनकी अमानत वापस कर दी जाती है। यह पूरा काम इस बार प्रशासन निगरानी में हुआ है। इसके लिए तहसीलदार से लेकर पटवारी तक की ड्यूटी लगाई गई है।
इस बार मंदिर में राशि जेवरात रखने वालों का तांता धनतेरस की पूर्व तक चलता रहा। इस राशि और जेवरात से पूरे मंदिर परिसर की नोटों और कीमती आभूषणों से सजावट की गई। 10 रुपए से दो हजार रुपए तक के नए नोटों से सजावट की गई है।
मंदिर की सजावट में क्षेत्रीय व्यापारियों का भरपूर सहयोग रहता है। रात में कामकाज निपट कर वे मंदिर की सजावट में सहयोग करने पहुंच जाते हैं। धन तेरस की पूर्व तक मंदिर में महिला भक्तों द्वारा कुबेर पोटली बनाई जाती है। कुबेर पोटली में कोड़ी, कमल गट्टा, बरकत के चावल, मोती और बरकती सिक्का रखा गया है।
महालक्ष्मी मंदिर वर्षों पुराना है। मंदिर के गर्भगृह में महालक्ष्मी की मूर्ति के साथ सरस्वती और गणेश मूर्ति भी स्थापित है। इसके अलावा परिसर में श्री विजया लक्ष्मी, वीर लक्ष्मी, संतानलक्ष्मी, अधीलक्ष्मी, धान्य लक्ष्मी, लक्ष्मीनारायण एवं धनलक्ष्मी की मूर्ति भी विराजित है मंदिर की मान्यता है कि यहाँ राशि रखने के बाद मिली राशि अपनी तिजोरी में रखने से साल भर धन्य धान और नगद की कमी घर में नही रहती है और बढ़ोत्तरी होती है। इस कारण लोग यहां दूर-दूर से राशि लेकर पहुँचते हैं।
