May 4, 2026

भारत के 51 शक्तिपीठों में से एक हैं मैहर

सतना। हिन्दू धर्म में माता जगदम्बा को शक्ति के स्वरूप में पूजा जाता है। पूरे भारत में माता के 51 शक्तिपीठ है। इन्हीं शक्तिपीठों में से एक सतना जिले के मैहर में स्थित है। मैहर का मतलब होता है माई का हार। दरअसल इस स्थल पर माता सती का कंठ गिरने से यहाँ सरस्वती स्वरूप मां शारदे विराजमान है और माता का हार गिरने की वजह से इस स्थान को माई का हार नाम से जाना जाता था जो बाद में मैहर हो गया।

चमत्कारिक मंदिर

मैहर के त्रिकूट पर्वत पर लगभग 600 फिट की ऊँचाई पर विराजित माता के दरबार में वर्ष की दोनों नवरात्रि में लाखों श्रद्धालुओं का तांता लगता हैं। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि माँ शारदा सर्व मनोकामनाओं को पूरा करने वाली हैं। माता के इस चमत्कारिक मंदिर में आज भी अमरत्व का वरदान प्राप्त महोबा जिले के आल्हा माँ की प्रथम पूजा करते हैं। जब भी मंदिर के पट खुलते हैं माँ की पूजा श्रृंगार हुए मिलते हैं।

पौराणिक मान्यता

शिवपुराण के अनुसार अपने पिता द्वारा भगवान शिव का अपमान करने से आहत होकर माता सती ने खुद को हवन कुंड में झोंक दिया था। इस पर भगवान शिव माता सती का पार्थिव शरीर को लेकर पूरे ब्रह्मांड में घूमने लगे। ऐसे में भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से माता सती के पार्थिव शरीर के टुकड़े कर दिए। माता सती के पार्थिव शरीर के टुकड़े जहाँ-जहाँ गिरे वह स्थान शक्तिपीठ बन गया। सतना के मैहर में माता सती का कंठ और हार गिरा था।

आदि गुरु शंकराचार्य ने की थी पूजा

मैहर में स्थित माता के मन्दिर के बारे में मान्यता है कि आदि गुरु शंकराचार्य ने यहाँ सबसे पहले पूजा की थी। माता के दरबार में भैरव बाबा के पीछे मंदिर के दाहिने तरफ एक दीवार पर अनोखी लिपि में कुछ लिखा है। इसे कोई समझ नहीं पाता है। यह 12वीं सदी से भी पुरानी प्रतीत होती है। इसका उल्लेख भारत के अन्य पर्वतों के साथ पुराणों में भी आया है। माना जाता है कि मैहर नगर का नाम माँ शारदा मंदिर के कारण ही अस्तित्व में आया।

दूर-दूर से आते हैं श्रद्धालु

यह माता के प्रति भक्तों का विश्वास ही हैं कि यहाँ दूर-दूर से श्रद्धालु खींचे चले आते हैं। खासकर साल की दोनों नवरात्री पर मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश सहित देश के कोने कोने से यहाँ भक्तों का मेला लगता है। बैठकी के दिन शारदा शक्तिपीठ तक पहुँचने के लिए पैदल यात्री कई दिन पहले ही अपने घर से निकल जाते हैं।

पहले यहाँ पहुँचने के लिए पगडंडी हुआ करती थी, लेकिन आज 1050 सुगम सीढ़ियां है। इसके अलावा वेन से भी पहुंचा जा सकता है। मंदिर प्रांगण में जिला प्रशासन द्वारा सीसीटीवी कैमरे लगवाए गए हैं ताकि जो श्रद्धालु मंदिर प्रांगण में ना हो वह भी आरती का लाभ ले सके। नवरात्री पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए विशेष पुलिस बल तैनात किया जाता है। यहाँ श्रद्धालुओं की सुरक्षा व्यवस्था और सुविधाओं का विशेष ख्याल रखा जाता है।

Written by XT Correspondent

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