शिवपुरी। कहावत है कि ‘जिसको काटे सांप पदम, नहीं चले वो दो कदम।‘ पदम सांप ‘किंग कोबरा’ को कहा जाता है। यह बेहद जहरीला सांप है जिसके काटने के बाद इंसान का बचना मुश्किल है। लेकिन एक आदिवासी व्यक्ति ऐसा भी है जिसके लिए जहरीले सांप पकड़ना बच्चों का खेल है। ख़ास बात यह है कि व्यक्ति पर सांप के काटने का कोई असर नहीं होता है। उल्टा उसे सांप काटने पर मजा आता है। काले वाईपर, घोड़ा पछाड़, काली नाग, काली नागिन सहित कई तरह के जहरीले सांप पकड़ना इसके लिए रोज का काम है।
खनियाधाना तहसील के ग्राम मोहासा का रहने वाला कल्लू आदिवासी लोगों की मदद करने के लिए सांप पकड़ने लोगों के घर पहुंच जाते हैं। कल्लू के दो ही शौक है पहला सांप पकड़ना और दूसरा शराब पीना। जहरीले से जहरीले सांपों को पकड़ना और खुद अपने शरीर के अंगों को सांपों से कटवाना कल्लू आदिवासी को बहुत ही अच्छा लगता है।
ग्रामीण कल्लू आदिवासी को विष पुत्र मानते है। कल्लू का कहना है कि मेरे पास कोई तंत्र मंत्र या देवीय शक्ति नहीं है। सांप को पकड़ना मेरा हुनर और शौक है। मुझे कई बार जहरीले सांपों ने काटा है लेकिन मुझे कुछ नहीं हुआ। चाहे कितना भी जहरीला सांप हो मैं उसको चंद सेकंड में अपने हाथों में पकड़ लेता हूं। अगर सांप मुझे काटता है तो सांप खुद बेहोशी की हालत में आ जाता है। कल्लू सापों के साथ ऐसे खेलता है जैसे बच्चे खिलौने के साथ खेलते हैं। गाँव के बुजुर्ग कहते हैं कि पहले विष पुत्र हुआ करते थे वहीं विष पुत्र कल्लू आज के जमाने में देखने को मिल रहा है।
कल्लू गरीब आदिवासी व्यक्ति है। वह एक झोपड़ी में रह कर अपना जीवन यापन कर रहा है। कल्लू पिछले तीन सालों से सांपों को पकड़ने का काम कर रहा है। गांव व आसपास के क्षेत्र में कहीं भी सांप निकल आए तो लोग सबसे पहले कल्लू को बुलाने आते हैं। कल्लू जैसे ही सांप को हाथ लगाता है वैसे ही सांप कल्लू के कब्जे में चंद सेकंडो में आ जाता है।
