कटनी। करीब चार दशक पहले आई फिल्म ‘नदिया के पार’ के गाने “कौन दिशा में ले के चला रे बटुहिया” की बैलगाड़ी अब तक हम सब के जहन में है। कटनी में इसी गाने की थीम पर बारात निकाली गई। इसके लिए दर्जनभर बैलगाड़ियों को सजाकर दूल्हा अपनी दुल्हन को लेने के लिए घर से निकला। यही नहीं शादी के बाद दूल्हा बैलगाड़ी में ही अपनी दुल्हन को लेकर घर पहुंचा।
यह अनोखी बारात कटनी जिले के तहसील मुख्यालय बरही से महज 3 किलोमीटर दूर ग्राम पंचायत करौंदी खुर्द में देखने को मिली। दरअसल करौंदी खुर्द निवासी पेशे से इलेक्ट्रिशियन रामकिशोर जायसवाल के बेटे महेंद्र का विवाह ग्राम बिचपुरा की रहने वाली आरती से हुआ। दोनों गांवों के बीच की दूरी महज दो किलोमीटर है। ऐसे में फिजूलखर्ची से बचने के लिए, अपनी पुरानी परंपरा को जीवित रखने के लिए और शादी को यादगार बनाने के लिए रामकिशोर और उनके मित्र ने बैलगाड़ियों से बारात जाने का निर्णय लिया।
रामकिशोर के निर्णय का परिवार वालों ने सामान किया और करीब दर्जनभर बैलगाड़ियों को बारात के लिए रंग-रोदन किया गया। इसके बाद 26 फरवरी की रात को करीब सात बजे करौंदी खुर्द से बारात बिचपुरा के लिए रवाना हुई। दूल्हा और सभी रिश्तेदार बैलगाड़ियों में बैठकर डीजे व बैंड बाजों की धुनों पर पूरे उत्साह व धूमधाम से रवाना हुए।
वहीँ नहीं अगले दिन विवाह कार्यक्रम सम्पन्न होने के बाद 27 फरवरी को दुल्हन की विदाई बैलगाड़ी में ही हुई। इस दौरान फिल्म ‘नदिया के पार’ का गाना “कौन दिशा में ले के चला रे बटुहिया” भी बजाया गया। इस अनोखी बारात को देखने के लिए ग्रामीणों में भी उत्सुकता नजर आई। बड़ी संख्या में ग्रामीण बारात को देखने के लिए पहुंचे।
