भोपाल। प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने चुनाव में संबल योजना को जनकल्याणकारी बताते हुए बड़े-बड़े दावे किए थे। अब वहीँ संबल योजना शिवराज के लिए मुसीबत बनती जा रही है। श्रम विभाग की जाँच में इस योजना में 6816 करोड़ के घोटाले का खुलासा हुआ है।
दरअसल श्रम विभाग की जाँच में सामने आया है कि 2.2 करोड़ लाभार्थियों में से करीब 71 लाख लाभार्थी अपात्र है। अपात्रों में भाजपा सरकार के समय भाजपा पार्टी के पन्ना-प्रभारी से लेकर अन्य लोग शामिल हैं, जिनमें करीब 35 हजार आयकर दाता तक शामिल है।
दरअसल संबल योजना के तहत उपभोक्ताओं को 200 रुपए का बिजली बिल आता था। 200 रुपए से अधिक का बिल सरकार ने चुकाना तय किया था। अब कमलनाथ सरकार ने इन पैसों की रिकवरी का फैसला किया है। यदि अपात्र लोग रिकवरी के तहत पैसे नहीं देते हैं, तो उन पर पुलिस कार्रवाई की जाएगी।
दरअसल पिछली शिवराज सरकार में विधानसभा चुनाव के पूर्व संबल योजना के तहत बड़े पैमाने पर पंजीयन किया गया। इस योजना में शामिल लोगों को बिजली बिल में सब्सिडी दी गई। इस योजना के लिए सरकार ने इसमें औसत 568 करोड़ रुपए महीना और सालभर में करीब 6816 करोड़ रुपया चुकाया गया।
