May 10, 2026

प्रदेश का ऐसा स्कूल जहाँ शिक्षक ही नहीं आते स्कूल

नरसिंहपुर। बच्चों को शिक्षा के लिए प्रेरित करने के लिए ‘पढ़ेगा इंडिया तभी तो आगे बढ़ेगा इंडिया’ जैसे नारे दिए जाते हैं। लेकिन जब स्कूल में पदस्थ शिक्षक ही स्कूल नहीं आए तो कैसे पढ़ेगा इंडिया। नरसिंहपुर जिले का एक स्कूल ऐसा ही हैं जहाँ सालों से पदस्थ शिक्षक स्कूल ही नहीं आते। अगर स्कूल आते भी है तो सिर्फ खानापूर्ति करके वापस लौट जाते हैं।

तस्वीरों में नजर आ रही स्कूल की आंगन में जर्द की मोटी परत खुद ही स्कूल की हालातों को बयान करती नजर आ रही है। नरसिंहपुर के आदिवासी ग्रामीण अंचल बिनैकी में स्थित यह प्राथमिक शाला कभी खुलता ही नहीं है। यहाँ पढ़ने के लिए बच्चे तो हैं लेकिन उन्हें पढ़ाने वाले स्कूल में पदस्थ शिक्षक खुद ही स्कूल नहीं आते हैं। महीने में एक-दो दिन आकर रजिस्टर में खुद की आमद दर्ज करा कर चले जाते हैं।

ग्रामीण बताते हैं कि पिछले 2 साल से उन्होंने कम ही बार स्कूल का ताला खुलते देखा है। ग्रामीणों को यह भी याद नहीं है कि आखिरी बार शिक्षक कब स्कूल आए थे। ग्रामीणों इस बात की शिकायत भी की लेकिन शिकायत करने पर उल्टा शिक्षकों द्वारा धमकी अलग दे दी जाती है। ऐसे में भोले-भाले आदिवासी करे भी तो क्या? आदिवासी अपने बच्चों के भविष्य के साथ हो रहे खिलवाड़ को देखकर भी मन मसोसकर रह जाते हैं।

स्कूल में शिक्षक नहीं आने का असर बच्चों की पढ़ाई पर भी साफ़ देखा जा सकता है। पांचवी क्लास के बच्चों को भी ककहरा तक नहीं आता है। आखिर आए भी तो कैसे जब शिक्षा सिर्फ सरकारी दफ्तरों की फाइल तक ही समिति रह जाए। जब बच्चों को कोई पढ़ाएगा ही नहीं तो बच्चे कैसे कुछ सीखेंगे?

स्कूल के बाजू से संचालित आंगनबाड़ी की प्रभारी बताती हैं कि इस स्कूल के बच्चों का भविष्य बेहद अंधकार में है। यह स्कूल कभी खुलता ही नहीं है। बच्चे रोज स्कूल पहुंचते हैं और आंगनबाड़ी केंद्र में मध्यान भोजन खाकर वापस लौट जाते हैं। कई बार शिकायतें की गई लेकिन हर बात ढाक के तीन पात की कहावत बिनैकी के स्कूल में चरितार्थ होती नजर आती है।

पहाड़ी अंचल में बसे बिनैकी गांव में दुर्गम रास्ते की वजह से इस स्कूल की कभी मॉनिटरिंग नहीं हो पाती है। यही वजह है कि यहां पदस्थ शिक्षक मुख्यालय में ना रह कर आसपास के शहरी क्षेत्रों से आते हैं जो महीने में एक बार आकर खानापूर्ति करके चले जाते हैं। जब मामले की जानकारी जिला शिक्षा अधिकारी को दी गई तो वह कार्यवाही की बात कह रहे हैं। साथ ही सतत मॉनिटरिंग कर दोषी शिक्षकों की निलंबन की बात करते नजर आ रहे हैं। वहीं जिले के कलेक्टर भी पूरे मामले को लेकर शिक्षकों की संवेदनहीनता की बात को स्वीकारते हुए पूरे मामले की जांच और वहां शिक्षकों की तैनाती की बात कहते नजर आ रहे हैं।

डिजिटल इंडिया के दौर में यह तस्वीरें मध्य प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था पर सवालिया निशान खड़े करती नजर आ रही है। मोटी-मोटी तनख्वाह पाने वाले शिक्षक किस तरह बच्चों की भविष्य से खिलवाड़ कर रहे हैं। यह मामला सिर्फ इसकी बानगी भर है। पूरे देश में ऐसे न जाने कितने स्कूल है जिन पर जड़ा ताला स्कूल चले अभियान को ग्रहण लगता नजर आ रहा है।

Written by XT Correspondent

bettilt giriş bettilt giriş bettilt pin up pinco pinco giriş bahsegel giriş bahsegel paribahis paribahis giriş casinomhub giriş rokubet giriş slotbey giriş marsbahis giriş casino siteleri