शिवपुरी, द टेलीप्रिंटर। मप्र के शिवपुरी जिले के भावखेड़ी गांव में जिस दलित परिवार के दो बच्चे की हत्या खुले में शौच जाने के कारण हुई वह दलित परिवार सरकार से मिलने वाली अन्य योजनाओं से भी महरूम है। उप्र की पूर्व मुख्यमंत्री और बसपा की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती के एक ट्वीट के बाद अब इस मुद्दे पर राजनीति गरमा गई है। ट्वीट में केन्द्र की मोदी सरकार पर दलित विरोधी होने के साथ योजनाओं से महरुम रखने का आरोप लगाया।
हमारे संवाददाता ने इस घटना पर भावखेडी गांव पंहुच कर ग्राउंड जीरो का जयजा लिया तो कई तरह की चौंका देने वाली हकीकत उजागर हुई। हैरानी की बात यह है कि बच्चों की हत्या खुले में शौच से नाराज होकर करना बतायी जा रही है। हमारी टीम ने जाकर देखा तो पता चला कि गांव के इस इकलौते दलित परिवार के घर में शौचालय तो बनाया गया लेकिन वह इतना घटिया है कि उसका इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। मजबूरी में परिवार खुले में शौच जाता था। इतना ही नहीं परिवार को ना आवास मिला ना दूसरी किसी योजना का फायदा। इस हकीकत को देखकर मायावती का ट्वीट हकीकत को बया करते दिखाई दे रहा है।
बुधवार को मायावती ने अपने ट्वीट के जरिए केंद्र की मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए अपने ट्वीट में लिखा है कि देश के करोड़ों दलितों, पिछड़ों व धार्मिक अल्पसंख्यकों को सरकारी सुविधाओं से काफी वंचित रखने के साथ-साथ उन्हें हर प्रकार के द्वेषपूर्ण जुल्म जायदतियों का शिकार बनाया जाता रहा है। मायावती ने अपने संदेश में शिवपुरी के भावखेड़ी में दो दलितों की हत्या पर दुख जताते हुए इस घटना की निंदा की है।
भावखेडी गांव में दलित परिवार की स्थिति खराब-
भावखेड़ी के इस दलित परिवार की मृतक बच्ची रोशनी के पिता कल्लू बाल्मिकी के घर में शौचालय तो है लेकिन घटिया निर्माण के कारण शौचालय बंद है। परिवार इसका उपयोग ही नहीं करता है। इस दलित परिवार की हालत यह है कि कई बार आवेदन देने के बाद भी इस परिवार को प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत नहीं हुआ है। परिवार कच्ची टपरिया में रहता है। मृतक दूसरे बच्चे अविनाश के पिता मनोज बाल्मिकी के घर में न शौचालय है और न उसे पीएम आवास स्वीकृति है। शौचालय निर्माण के लिए मनोज कई बार अपना आवेदन पंचायत के सरपंच सूरज यादव को दे चुका है लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई है। कुल मिलाकर यह दलित परिवार सरकारी की योजनाएं न मिलने से पहले से ही परेशान था और बुधवार को गांव के दबंग ने खुले में शौच जाने के चलते इस परिवार के दो बच्चों को मौत के घाट उतार दिया। इसके अलावा इस गांव को जिला प्रशासन ने ओडीएफ (खुले में शौच से मुक्त गांव) घोषित किया हुआ है।
खुले में शौच जाने पर चल गई दो बच्चों की जान-
केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार एक और स्वच्छता अभियान अंतर्गत घर-घर में शौचालय निर्माण और विभिन्न गांवों को ओडीएफ किए जाने के दावा कर रही। वहीं भावखेड़ी गांव में खुले में शौच जाने पर दो बच्चों को कुछ दबंगों ने मौत के घाट उतार दिया। भावखेड़ी ग्राम में दिल दहलाने वाली इस घटना में दोनों बच्चे बाल्मिकी समाज से आते हैं। यहां पर शौच के लिए गए दो बच्चों को दो सिरफिरों ने लाठियों से पीट-पीट कर हत्या कर दी। जिन बच्चों को मौत के घाट उतारा गया है उनका नाम अविनाश (10) और बच्ची का नाम रोशनी (12) है। बुधवार की सुबह दोनों अपने घर से शौच के लिए निकले थे। आरोपी हाकिम व रामरूवरूप को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।
गांव के हाकिम ने उतारा मौत के घाट-
बुधवार की सुबह सिरसौद थाना क्षेत्र के ग्राम भावखेड़ी में दो मासूम रोशनी और अविनाश के लिए खुले में शौच जाना मौत का कारण बन गया। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि यह दोनों बच्चे जब खुले में शौच के लिए गए तो यह बात गांव के ही हाकिम यादव को रास नहीं आई। उसके अपने एक अन्य साथी रामेश्वर यादव के साथ मिलकर बच्चों को मौत के घाट उतार दिया। गांव के सरपंच सूरज यादव ने बताया कि बच्चों को मौत के घाट उतारने वाला हाकिम मानसिक रूप से विक्षिप्त है। उन्होंने बताया कि वैसे कल्ला के घर में शौचालय है लेकिन वह उसका उपयोग नहीं करता। जबकि मनोज का आवेदन लंबित है।
बेहद गरीबी की हालत में है दलित परिवार-
भावखेड़ी गांव के दोनों मृतक बच्चों का परिवार बेहद गरीबी की हालत में है। घर में बंद पड़े शौचालय के कारण दोनों बच्चे खुले में शौच के लिए गए थे। जिस हाकिम ने बच्चों को मौत के घाट उतारा है उसके खेत के पास ही दोनों बच्चों का खुले में शौच करना उनकी मौत का कारण बन गया।
क्या कहते हैं सरपंच-
हमारा गांव ओडीएफ है फिर भी गांव के लोग खुले में शौच जाते हैं। कल्ला बाल्मिकी के घर पर शौचालय बना है लेकिन वह बंद है। मनोज के घर पर शौचालय नहीं है क्यों कि उसकी मंजूरी नहीं मिली है। इस बाल्मिकी परिवार के पीएम आवास मंजूर नहीं हुआ है क्योंकि नए आवास हमारे गांव में स्वीकृत ही नहीं हुए हैं।
सूरज यादव, सरपंच, भावखेड़ी ग्राम पंचायत जिला शिवपुरी
