देवास। क्या आप सोच सकते हैं कि कोई सरकारी स्कूल भी ऐसा हो सकता है, जिसका अनुसरण निजी स्कूल भी करना चाहते हैं। सुविधाओं ही नहीं पढ़ाई की अपनी ख़ास स्टाइल के लिए भी इसे पूरे प्रदेश में ‘वाल ऑफ फेम’ का दर्ज़ा देकर सम्मानित किया गया है। ग्रामीणों ने स्कूल को पचास लाख से ज़्यादा की सामग्री दान दी है।
देवास जिले के बागली ब्लॉक के छोटे-से गाँव छतरपुरा का सरकारी स्कूल इन दिनों पूरे प्रदेश में पहचाना जा रहा है। इस सरकारी स्कूल में हुए बदलाव के बाद यहाँ की तस्वीर गुरुकुल की तरह दिखाई देती है। गुरुकुल की तरह पेड़ों की झुरमुट और शांतिपूर्ण परिवेश में कुछ बच्चे एक कार्ड बोर्ड पर बने सौर मंडल में ग्रहों की स्थिति देख रहे हैं। यह सौर मंडल उन्होंने खुद ही बनाया है।इसमें लाइट भी जलती है। कुछ बच्चे जिम में वेट लिफ्टिंग कर रहे हैं तो कुछ बैंड की स्वर लहरियों पर स्वच्छता का गीत सीख रहे हैं।
प्रधानाध्यापक हेमेंद्र शिवहरे बताते हैं कि यहाँ की पढ़ाई और विशेषताओं के लिए प्रदेशभर में इसे अव्वल मानकर शिक्षा विभाग ने इसे ‘वाल ऑफ फेम’ यानी प्रसिद्ध चुनिंदा स्कूलों में शामिल कर इसे अपनी साइट पर जगह दी है।प्रदेश के सरकारी शिक्षकों की यहाँ विजिट कराई जाती है ताकि वे इससे प्रेरणा ले सकें। इसे टीएलएम यानी टीचिंग लर्निंग मटेरियल बनाने और उनके ज़रिए खेल खेल में सीखाने के लिए भी कई बार सम्मानित किया जा चुका है।
यह भी बड़ी बात है कि गाँव के लोगों ने इस सरकारी स्कूल के लिए पचास लाख से ज़्यादा का सामान दान में दिया है। जिम, बैंड, पानी की मोटर, गद्दे, फर्नीचर, स्मार्ट क्लास की टीवी और खेल का सामान भी दिया गया है। इसमें वे लोग भी शामिल हैं, जिनके बच्चे यहाँ नहीं पढ़ते।
सरकारी स्कूल की अपनी जिम, अपना बैंड, स्मार्ट क्लास, आरओ, एक बीघा का बगीचा, खेल सामग्री, मैदान और फर्नीचर सब कुछ है। यहाँ बच्चे टाट पट्टी पर नहीं गद्दों पर बैठते हैं। अस्सी फीसदी बच्चे अजा, अजजा वर्ग के हैं और कुछ तो आसपास के गाँवों से पढ़ने आते है।सफाई पर यहाँ खास ध्यान दिया जाता है।बच्चे खुद के बनाए मॉडल और सहायक सामग्री से खेल-खेल में मनोरंजक तरीके से पढ़ते हैं।
