नरसिंहपुर। नरसिंहपुर जिले का एक शख्स पिछले 18 सालों से बच्चों को संस्कृत के ज्ञान का प्रकाश निशुल्क देता आ रहा है। यह शख्स भले ही 4 बाई 8 की टूटी झोपड़ी में जीवन यापन कर रहा है, लेकिन अपने ज्ञान के प्रकाश से नौनिहालों का भविष्य बनाने में जुटा है।
नरसिंहपुर जिले के छोटी से गांव संगाई में रहने वाले 66 साल के वृद्ध का नाम श्याम स्वरूप है। श्याम स्वरूप पिछले 18 सालों से स्कूल के बच्चों को संस्कृत की निशुल्क शिक्षा दे रहे हैं। श्याम स्वरूप ने विवाह नहीं किया है। टूटी झोपड़ी में रहने वाले श्याम स्वरूप पेट की खातिर घर में रखे कांसे के पुराने बर्तन तक बेच डाले लेकिन कभी किसी के आगे हाथ नहीं फैलाए। उनकी नित्य दिनचर्या स्कूल से शुरू होती है और संस्कृत की शिक्षण बच्चों को देकर ही खत्म होती है।
श्याम स्वरूप ने संस्कृत भाषा में एमए किया हुआ है। वह पहले संस्कृत पुस्तकालय केंद्र में बतौर प्रेरक के रूप में सेवाएं देते थे। अब श्याम स्वरूप संस्कृत शिक्षक के रूप में अपना किरदार निभा रहे हैं। उन्होंने अपना सर्वत्र जीवन बच्चों को पढ़ाने में न्योछावर कर दिया। स्कूल के छात्र-छात्राएं भी बताते हैं कि उनके शिक्षण का तरीका बेहद ही सरल और स्पष्ट है। कई सालों से वह इसी तरह निशुल्क पढ़ा रहे हैं।
संगाई प्राथमिक शाला की शिक्षक बताते हैं कि श्याम स्वरूप 1995 से लगातार निशुल्क बच्चों को पढ़ा रहे हैं। बेहद गरीबी परिस्थिति में जीवन यापन करने वाले श्याम स्वरूप खरे जैसे महान शख्सियत कम ही देखने को मिलती है।
श्याम स्वरूप ने भले ही अपना जीवन बच्चों की पढ़ाई के लिए समर्पित कर दिया हो लेकिन प्रशासन ने कभी उसकी सुध नहीं ली। उन्हें न किसी शासकीय योजना का लाभ मिला और ना ही वृद्ध पेंशन।
