धार। सरदार सरोवर बांध के बेक वाटर के कारण मध्य प्रदेश के कई गांवों का अस्तित्व ही समाप्त हो गया है। जल स्तर बढ़ने के कारण हजारों की संख्या में लोगों को अपना गाँव छोड़कर जाना पड़ा है। हालाँकि अब धीरे-धीरे नर्मदा नदी के जलस्तर में गिरावट आ रही है। नर्मदा का जलस्तर करीब तीन मीटर तक कम हो चुका है। बैकवाटर में डूबे पेड़, मकान और खेत अब बाहर आने लगे हैं। गांवों से पलायन कर चुके लोग वापस अपने गाँव को देखने के लिए पहुँच रहे हैं। लेकिन गांवों का मंजर देख लोगों की आँखों आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं। सब दूर तबाही का मंजर नजर आ रहा है।
धार जिले के अंतिम छोर का गांव चिखल्दा इस वर्ष सितंबर के अंतिम सप्ताह में जलमग्न हो गया था। यह नर्मदा नदी से डूबने वाला मध्यप्रदेश का सबसे बड़ी आबादी वाला गांव था। डूबने के कारण गाँव के लोगों को पलायन कर जाना पड़ा था। अब जब जलस्तर घट रहा हैं तो लोग अपने गाँव को देखने पहुंचें। लेकिन यहाँ का नजारा देख उनकी आँखों से आंसू टपक पड़े। पानी के कारण मकान पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गए हैं। पेड़ पूरी तरह से सड़ चुके हैं।
यहीं हाल सरदार सरोवर बांध के बेक वाटर से प्रभावित दूसरे गांवों का भी है। लोग कह रहे हैं कि पहले जहाँ खुशियों का माहौल था, वहां अब टूटे मकान हैं। चारों ओर बर्बादी ही बर्बादी नजर आ रही है। चारों तरफ से बदबू आ रही है।
अधिकारियों ने बताया कि सरदार सरोवर बांध से नहरों में पानी छोड़ने के साथ ही बिजली बनाई जा रही है। इस कारण से जलस्तर में कमी आ रही है। डूब पीड़ित मूल गांव में लौटने लगे हैं।
