जबलपुर। चमत्कार की आस में होशंगाबाद में लोगों के बीच महुआ के पेड़ को छूने की होड़ मच गई थी। कुछ ऐसा ही मामला जबलपुर में भी सामने आया है। यहाँ महुआ के पेड़ को लोग चमत्कारी पेड़ मानकर बीमारी से निजात पाने की उम्मीद से पहुँच रहे हैं।
इसे आस्था कहें कि अंधविश्वास। जबलपुर के बरगी विधानसभा क्षेत्र में लोढ़ी पिपरिया गांव में दूर-दूर से रोजाना सैकड़ों लोग पहुँच रहे हैं। लोगों का विश्वास हैं कि यहाँ मौजूद महुआ के पेड़ को छूने मात्र से बीमारी से छुटकारा मिल जाता है। लोग महुआ के पेड़ की पूजा कर रहे हैं। सुबह होते ही यहाँ हुजूम उमड़ पड़ता है। देर शाम तक पूजा अर्चना का सिलसिला चलता रहता है। लोग दूर-दूर से चमत्कार मानकर पेड़ को छूने के लिए पहुंच रहे हैं।
लोगों का मानना है कि पेड़ में भगवान शिव शंकर की कृपा से कोई दैवीय शक्ति विराजमान है। क्योंकि इसके पास पहुंचने पर पेड़ लोगों को अपने पास खींचता है। इस बात की सूचना आग की तरह सोशल मीडिया परफैल गई। लगभग पंद्रह दिनों में करीब लाखों लोग चमत्कारी पेड़ को छूने पहुंच चुके हैं।
गाँव के लोगों का कहना है कि इस पेड़ पर एक ऐसा प्रकाश दिखा है कि देखकर आंखे फटी की फटी रह जाए। जब पास में जाकर पेड़ को छूकर देखा तो शांति मिली। गाँव के लोगो ने महुआ के पेड़ की पूजा अर्चना की तो उनके रोग और दर्द गायब हो गये। तभी आसपास के लोगो ने भी इसे आजमाया। जिसके बाद से ही यहां लोग पहुँच रहे हैं|
वहीँ कुछ लोंगों का कहना है कि सोशल मीडिया पर वायरल मैसेज के बाद यहां मजमा लगना शुरू हुआ है। लोगों में ये भ्रांति फैल गई है कि इस पेड़ को छूने से गंभीर से गंभीर बीमारी भी जड़ से खत्म हो जाती है। बस इसी बात को सच मानकर रोजाना हजारों की तादाद में दूर दराज से लोग इस पेड़ को छूने, पूजा अर्चना करने पहुंच रहे हैं। हालत ये है कि प्रशासन के लिए हजारों लोगों की इस भीड़ को संभालना मुश्किल हो गया है। पुलिस, प्रशासन व वन विभाग अंधविश्वास के कारण लगे इस मेले से परेशान हैं और जंगल के कानून भी बेअसर हो गए हैं।
अंधभक्ति के इस मेले में कुछ लोंगो ने कमाई का रास्ता भी निकाल लिया है। कुछ ग्रामीण लोगो ने आस्था धर्म के नाम चंदा इकट्ठा करना भी चालू कर दिया है। आने जाने वाले लोगो से व्यवस्था के नाम पर पैसों की वसूली भी शुरू हो गई है। हालांकि आस्था और अंधविश्वास में झूलते इस गांव में जल्द ही प्रशानिक अधिकारियों, वन विभाग के जिम्मेदारों ने कोई ठोस उपाय या जागरूकता के प्रयास नहीं किये तो यहाँ भीड़ को काबू करना मुश्किल हो जाएगा।
