May 10, 2026

पैडमैन से प्रेरित होकर डाल दी पैड यूनिट, अब बना अभियान

नीमच। अक्षय कुमार की फिल्म ‘पैडमैन’ से एक युवक इतना प्रभावित हुए कि उसने सेनेटरी पैड बनाने की यूनिट डाल दी। इस यूनिट से जहाँ एक तरह 15 महिलाओं को रोजगार मिल रहा है। वहीँ दूसरी तरह हजारों महिलाओं को गंभीर बीमारियों के खतरे से बचाया है। आज यह युवक अपनी टीम के साथ घर-घर जाकर महिलाओं को सस्ता और उच्च क्वालिटी का पैड बांटता है। एक पैकेट पर युवक को मात्र एक रुपए का फायदा होता है, लेकिन महिलाओं की सुरक्षा के लिए वह इस काम में लगा हुआ है।

नीमच जिले के खोर गांव में रहने वाला पोस्ट ग्रेजुएट भूपेंद्र खोईवाल सेनेटरी पैड बनाने का काम करता है। भूपेंद्र के साथ 15 महिलाएं पैड बनाने का काम करती है। भूपेंद्र का कहना है कि उनके यहाँ बनने वाले पैड सस्ते और अच्छी क्वालिटी के होते है। भूपेंद्र पैड को मेडिकल स्टोर या जनरल स्टोर पर नहीं बल्कि घर-घर जाकर बेचते हैं। साथ ही उनका पूरा रिकॉर्ड भी मोबाइल नंबर के साथ रजिस्टर में दर्ज रखते हैं।

भूपेंद्र बताते हैं कि वह ऐसा काम करना चाहते थे, जिससे कमाई के साथ लोगों का भला हो। एक दिन उन्होंने अक्षय कुमार की फिल्म ‘पैडमैन’ देखी। फिल्म से वह इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने महिलाओं के लिए सेनेटरी पैड बनाने की ठान ली। शुरुआत में उनके पिता ने इस काम के लिए साफ़ मना कर दिया। ऐसे में भूपेंद्र चार दिनों तक घर नहीं गए और पिता से बात नहीं की। तब कहीं जाकर उनके पिता ने इसके लिए हामी भर दी।

भूपेंद्र ने अपने पिता से साढ़े तीन लाख रुपए लिए और सेनेटरी पैड बनाने का एक यूनिट खोर गांव में डाल दिया। भूपेंद्र ने सेनेटरी पैड बनाने का यूनिट तो डाल दिया लेकिन बड़ी समस्या यह थी कि उसे बेचा कैसे जाए। इसके लिए भूपेंद्र ने एक जुगत लगाई और अपने यूनिट की दो-तीन महिलाओं को साथ लेकर घर-घर जाकर महिलाओं से गंदे कपड़े से होने वाले इंफेक्शन के बारे में चर्चा की, उन्हें इंफेक्शन के खतरे भी बताएं।

शुरुआती दौर में भूपेंद्र ने कई महिलाओं को मुफ्त सेनेटरी पैड भी दिए और दिन रात मेहनत करके धीरे-धीरे महिलाओं को माहवारी में होने वाले गंदे कपड़े के इंफेक्शन के बारे में जागरूक किया। चार महीने में भूपेंद्र जहां एक ओर अपने यूनिट में 15 महिलाओं को रोजगार दे चुके हैं तो वही लगभग 24000 पैड ग्रामीण महिलाओं तक पहुंचा भी चुके हैं।

भूपेंद्र का कहना है कि वह 20 रुपए में 8 सेनेटरी पैड का पैक देते हैं, जिसमें वह सारी चीजें हैं जो इस रेट में अन्य सेनेटरी पैड में भी नहीं मिल पाती। महिलाओं को एक पैड मात्र ढाई रुपये का पड़ता है। इसमें उच्च किस्म की जेल शीट लेयर दी जाती है।

भूपेंद्र के अनुसार उन्हें एक पैकेट पर फिलहाल एक रुपए की ही कमाई होती है लेकिन कमाई से ज्यादा उनकी रुचि महिलाओं को गंदे कपड़े से आजादी दिलाने में है। भूपेंद्र मानते हैं कि उनके इस सेनेटरी पैड बनाने के काम का लोग मजाक उड़ाते हैं लेकिन उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता। उनका लक्ष्य है कि नीमच जिले की लगभग तीन लाख महिलाओं तक उनके सेनेटरी पैड पहुंच जाएं।

भूपेंद्र की प्लानिंग कहीं न कहीं सार्थक भी लगती है क्यों कि इससे महिलाओं को ना सिर्फ रोजगार मिल रहा है बल्कि महिलाओं को गंभीर बीमारी से सुरक्षा भी मिल रही है। इनके बनाए हुए सेनेटरी पैड किसी मेडिकल या जनरल स्टोर पर नहीं मिलते इन्हें बेचने का काम उसी कॉलोनी या बस्ती की कोई महिला करती है, जो पैड खरीदने वाली महिला का पूरा रिकॉर्ड भी मेंटेन रखती है।

प्रतिदिन भूपेंद्र सुबह या शाम को अपने यूनिट पर काम करने वाली महिलाओं के साथ छोटी बस्तियों तथा मोहल्लों में जाते हैं और अपने पैड बेचने के साथ-साथ उन्हें कपड़े के इस्तेमाल से होने वाले खतरों के बारे में जागरूक भी करते हैं।

भूपेंद्र ने एक लक्ष्य बनाकर अपना बिजनेस चालू किया है जिसमें महिलाओं की सुरक्षा और परेशानियों को महत्ता दी गई है। यकीनन भूपेंद्र चाहते तो कोई और भी बिजनेस खोल सकते थे लेकिन उन्होंने महिलाओं की चिंता करते हुए उन्हें गंदे कपड़े से आजादी के लिए अपना एक मिशन भी बनाया है। इस काम में वो अकेले नही है, उनकी पूरी टीम साथ है जो पैड बनाती भी है और घर घर तक पहुँचाती भी है।

Written by XT Correspondent

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