अशोकनगर। मध्यप्रदेश के अशोकनगर जिले के चंदेरी की साड़ियाँ देश-विदेश में ख़ास पहचान रखती है। लेकिन कोरोना संकट के कारण यहां का साड़ियों का कारोबार बुरी तरह प्रभावित हुआ है। हालत यह है कि यहां के बुनकर आज आजीविका के लिए संघर्ष कर रहे हैं। कई बुनकर ऐसे भी हैं, जिन्हें पलायन करने पर मजबूर होना पड़ा है।
गौरतलब है कि अशोकनगर जिले के चंदेरी की साड़ियाँ देश-विदेश में खासी प्रसिद्ध है। बॉलीवुड की अभिनेत्रियां भी चंदेरी की साड़ियाँ पहनना पसंद करती है। यहां लगभग 6000 हथकरघा बुनकर 600 साल पुराने इस पुश्तैनी काम में लगे हुए हैं, लेकिन लॉकडाउन के कारण अब इनके सामने रोजी-रोटी का संकट आ खड़ा हुआ है।
लॉकडाउन से पहले बुनकर को एक सप्ताह में एक साड़ी की मजदूरी पांच से सात हजार रुपये तक मिलती थी लेकिन अब एक साड़ी तैयार करने पर 300 से 500 रुपये मजदूरी मिल रही है। यही कारण है कि लगभग 2000 रोजी-रोटी की तलाश में दूसरे शहरों में चले गए हैं। वहीं 500 से अधिक बुनकरों ने अपने क्षेत्र में ही दूसरा काम ढूंढ लिया है।
बता दे कि चंदेरी की दो चश्मी, नाल फेरमा, मेहंदी लगे हाथ साड़ियों की डिजाइन विदेशों तक मशहूर हैं। यहां की मेहंदी लगे हाथ साड़ी को पूर्व राष्ट्रपति ज्ञानी जेल सिंह ने राष्ट्रीय अवार्ड दिया था। इसके अलावा साल 2010 में हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में 72 देशों के पदक विजेताओं को चंदेरी का दुपट्टा ओढ़ाया गया था।
व्यापारियों के अनुसार लॉकडाउन में करीब 100 करोड़ रुपए की लागत से साड़ियां, सूट और दुपट्टे तैयार करवाकर रखे हैं लेकिन कोरोना संकट के कारण देश-विदेश में कोई खरीदार ही नहीं मिल रहा है। उनके पास अब कच्चा माल खरीदने के भी पैसे नहीं हैं।
चंदेरी के व्यापारी का कहना है कि यहां से महाराष्ट्र, दिल्ली सहित अन्य महानगरों में हर महीने 15 करोड़ रुपए की साड़ियाँ जाती हैं, वहीं अमेरिका, लंदन और इटली में भी यहां की साड़ियों की काफी मांग हैं। लेकिन कोरोना की वजह से 90 दिन में एक भी साड़ी और कपड़ा नहीं बिका है।
