दमोह। जल संकट से जूझ रहे ग्रामीणों ने ढाई महीने की कड़ी मेहनत से अपनी समस्या को दूर कर लिया। 15 ग्रामीणों ने पत्थर का सीना चीरकर गहरा नाला बना दिया। अब इस नाले में जमा पानी से 100 एकड़ से अधिक भूमि पर फसल लहलहा उठी है।
दरअसल दमोह जिले के करकोई गाँव में रहने वाले आदिवासी काफी समय से जल संकट से जूझ रहे हैं। आदिवासियों को पीने के पानी के लिए दो किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है। आदिवासियों की कमाई का मुख्य जरिया खेती है लेकिन पानी न होने के कारण आदिवासी किसान दूसरी फसल की पैदावार नहीं कर पाते थे।
अपनी इस समस्या को दूर करने के लिए 15 ग्रामीणों ने ढाई महीने की कड़ी मेहनत से एक छोटे से नाले को खुदाई कर पांच फीट तक गहरा कर दिया और बड़े नाले का स्वरूप देना शुरू कर दिया। नतीजा यह हुआ कि आज नाले में पांच फीट गहरा और 100 मीटर में पानी भर गया। ग्रामीण इस पानी का उपयोग पीने, खेती करने और मवेशियों के लिए कर रहे हैं। ग्रामीण अभी भी नाले को बड़ा करने का काम कर रहे हैं ताकि ज्यादा पानी जमा हो सके।
दिसम्बर में शुरू किए गए इस काम की शुरुआत में ग्रामीणों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा, लेकिन ग्रामीणों ने अपनी हिम्मत से सारी कठिनाइयों को दूर कर दिया। गाँव के सरपंच का कहना है कि गाँव में पानी का कोई स्त्रोत नहीं था। ऐसे में ग्रामीणों ने खुदाई कर छोटे से नाले को बड़ा रूप दे दिया। यह काम वाकई काबिले तारीफ़ है।
