आगर-मालवा। सिस्टम की इससे बड़ी लापरवाही क्या होगी कि एक 50 वर्षीय विधवा महिला तीन महीने से अपने आप को जिन्दा साबित की जद्दोजहद कर रही है। सिस्टम ने महिला को कागजों पर मृत बता दिया है। इससे महिला को शासकीय योजनाओं का लाभ नही मिल पा रहा है। ऐसे में महिला अपने आप के जीवित होने का सबूत देने के लिए भटक रही है।
जिन्दा महिला को मृत घोषित करने का अनोखा कारनामा किया है आगर-मालवा जिले की सुसनेर नगर परिषद ने। क्षेत्र के जामुनिया रोड पर निवास करने वाली गीता बाई पाटीदार के पति की मृत्यु 25 वर्ष पहले हो चुकी थी। एक साल पहले जैसे-तैसे शासन की और से मिलने वाली विधवा पेंशन शुरू हुई। पिछले तीन माह से जब महिला के खाते में पेंशन नहीं पहुंची तो महिला कारण जानने के लिए नगर परिषद पहुँची। वहां पता चला कि 26 सितंबर 2019 को ही उन्हें मृत घोषित करके समग्र आईडी डिलीट कर दी गई है। जबकि गीताबाई पूर्णतः स्वस्थ है और जीवित है साथ ही अपनी दैनिक दिनचर्या कर रही है।
अब महिला सरकारी ऑफिस के चक्कर लगा रही है तो अधिकारी फिर से आवेदन देने तथा कई कागजी खानापूर्ति करने की बात कह रहे हैं। हालाँकि सिस्टम की खामियों की वजह से महिला को पेंशन सहित अन्य शासकीय योजना का लाभ अब नहीं मिल पा रहा है। जिम्मेदार इस महिला की पेंशन पुनः शुरू करने की बात तो कर रहे है लेकिन उसे शासन की और दी जाने वाली पेंशन तीन माह से नहीं मिल सकी इस पेंशन का क्या होगा इसका जवाब किसी के पास नहीं है।
