उज्जैन। गीता हॉस्पिटल एवं रिसर्च सेन्टर बड़नगर में अभी तक कई तरह के जहरीले सर्पदंश से पीड़ित 5 हजार से अधिक रोगियों की जान बचायी जा चुकी है। लेकिन हाल ही में यहाँ एक ऐसी महिला की जान बचाई गई जिसके चेहरे पर रसेल वाइपर साँप द्वारा काटने से फेफड़े से गंभीर रक्तस्त्राव होने लगा था। संभवतः यह विश्व का पहला मामला है जब किसी के चेहरे पर रसेल वाइपर साँप द्वारा काटने के बाद उसकी जान बचाई गई।
डॉक्टर सुरेशचंद्र खटोड़ ने मामले की जानकारी देते हुए बताया कि, 30 वर्षीय आदिवासी महिला रेखा पति सुरेश निवासी खेरवास तहसील बदनावर जिला धार के चेहरे पर 14 नवम्बर को रसेल वाइपर प्रजाति के साँप ने डस लिया था। करीब तीन घंटे पर झाड़ फूंक कराने के बाद महिला को अस्पताल लाया गया। तब तक महिला का चेहरा, मुंह के अंदर और बाहर, सम्पूर्ण श्वसन तंत्र एवं आहार नली में भयंकर सूजन एवं रक्तस्राव की चपेट में आ चुका था।
डॉक्टर ने बताया कि जब महिला हमारे पास आई तब तक वह लगभग मरणासन्न स्थिति में जा चुकी थी। ऐसे में श्वसन क्रिया को वेन्टीलेटर द्वारा जारी रखना भी संभव नहीं हो पा रहा था। ऐसे में डॉक्टर वनिता खटोड़ ने तुरंत रोगी के गले में ऑपरेशन कर साँस देने की प्रकिया शुरू की। इसके बाद जहर के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए तुरंत आवश्यक उपचार किया गया। हालाँकि इसके बाद भी रोगी के होंठ, आँखे एवं मुँह के अन्दर के अलावा फेफड़े से भी रक्तस्राव शुरू हो चुका था। जिसे कंट्रोल करना चुनौती पूर्व कार्य था।
डॉक्टर खटोड़ के अनुसार रोगी को रक्तस्त्राव के साथ-साथ गंभीर इन्फेक्शन, हिमोलाइसिस, गुर्दा जाम होना एवं शोक की वजह से पेशाव बंद होने जैसी समस्याओं से गुजरना पड़ा। लेकिन धीरे-धीरे इन सभी समस्याओं से मुक्त होते हुए करीब 3 सप्ताह बाद रेखा पूर्णतया स्वस्थ हो गई। अब वह एक दो दिनों में अपने घर चली जाएगी।
विश्व के मेडिकल इतिहास में इस रोगी की जीवन रक्षा के साथ ही गीता हॉस्पिटल बड़नगर ने सर्पदंश चिकित्सा में एक नया कीर्तिमान रच बड़नगर को संपूर्ण विश्व में स्थापित कर दिया। इस बिरले रोगी के बारे में गीता हॉस्पिटल के संचालक एवं प्रमुख सर्पदंश एवं गंभीर रोग विशेषज्ञ डॉक्टर खटोड़ ने बताया कि इन तीन सप्ताह लम्बे उपचार के दौरान कई ऐसे भी पड़ाव आए जब रेखा का जीवन खतरे में दिखाई देने लगा लेकिन हॉस्पिटल की अनुभवी टीम डॉ. अशोक चौहान, डॉ. के पी शिवहरे, डॉ. प्रकाश मिश्रा एवं अन्य डॉक्टर्स एवं नर्सिंग स्टाफ ने दिन रात अटूट मेहनत की।
