रतलाम। जिस मासूम बच्ची को कोई बोझ समझकर झाड़ियों में फेंक गया था। जब उसे अस्पताल लाया गया तो वह सभी की लाड़ली बन गई। कोई उसे पिंकी कहता है तो कोई उसे अनन्या। हालाँकि अब बच्ची को शिशु गृह भेजा गया है। अस्पताल का नर्सिंग स्टाफ बच्ची को शिशु गृह भेजे जाने से खुश भी है और उससे बिछड़ने से दुखी भी है।
दरअसल जन्म लेने के कुछ ही समय बाद बच्चों को कोई निवस्त्र हालत में कचरे के पास झाड़ियों में छोड़ गया था। सुबह जब एक राहगीर की नगर ठंडी हवा से कपकपाती नवजात पर पड़ी तो उसने तुरंत पुलिस और चाइल्ड लाइन टीम को सूचना दी। चाइल्ड लाइन टीम बच्ची को लेकर मदर चाइल्ड यूनिट लेकर पहुंची। यहाँ बच्ची को आईसीयू में भर्ती कर उपचार शुरू किया गया। नवजात काफी बीमार थी उसे तीन दिनों तक डॉक्टर डॉ. नावेद कुरैशी ने बाल एवं नवजात गहन चिकित्सा इकाई में अपनी देख रेख में रखा।
बच्ची को सांस लेने में तकलीफ हो रही थी। उसके शरीर का वजन और तापमान कम था। आख़िरकार एक हफ्ते के उपचार के बाद मासूम बच्ची स्वस्थ हो कर चहचहाने लगी। जब नवजात बच्ची की आंखे टिमटिमाने लगी तो उसे चाहने वालों की लाइन लग गई। अस्पताल के नर्सिंग स्टाफ में कोई उसे प्यार से अनन्या कह कर दुलारता तो कोई पिंकी कहकर प्यार करता।
हालाँकि अब बच्ची को नियमों के अनुसार उज्जैन के शिशु गृह में भेज दिया। नवजात को एमसीएच से ले जाने पर उसे दुलार देने वाली नर्सिंग स्टाफ खुश भी थी वहीँ उसे यहां से ले जाने का गम भी था। चाइल्ड लाइन प्रभारी प्रेम चौधरी ने बताया है कि बच्ची को गोद लेने के लिए सैकड़ों लोग आगे आए है। हालांकि ऑनलाइन आवेदन आने पर अब नियमों के तहत कार्यवाही होगी। ताकि सबकी लाड़ली किसी सूनी गोद को आबाद कर अपनी किलकारी से खुशियां भर दे।
