नरसिंहपुर। स्कूल में पढ़ने वाले मासूम बच्चों के कंधो पर बढ़ता बस्तों का बोझ चिंता का विषय है। इस बोझ को कम करने के लिए प्रदेश एक सरकारी स्कूल के टीचर ने अभिनव पहल की है। टीचर ने स्कूल में ही बुक बैंक बना दिया है। इससे बच्चों को रोजाना किताबें लाने ले जाने से छुटकारा मिल गया। शिक्षक की इस पहल से तमाम आला अधिकारी भी काफी प्रभावित हैं। अब इसे पूरे जिले में लागू करने पर विचार किया जा रहा है।
नरसिंहपुर के बौछार गांव में स्थिति शासकीय कन्या माध्यमिक विद्यालय में छठीं से आठवीं तक पढ़ाई होती है। स्कूल में 80 से ज्यादा छात्राएं पढ़ाई करती है। इन छात्राओं को रोजाना घर से भारी भरकम बैग लेकर स्कूल नहीं आना पढ़ता है। यहाँ बच्चे स्कूल में लोहे से बनी रैक से किताबें उठाकर पढ़ते हैं। पढ़ाई के बाद किताबों को वापस रैक में रखकर घर चले जाते हैं।
बच्चों के बस्ते का बोझ कम करने का यह तरीका स्कूल के शिक्षक आनंद नेमा ने निकाला है। यही नहीं नेमा ने बिना सरकारी मदद से स्कूल में माडल क्लास के लिए जनभागीदारी से एलसीडी टीवी भी लगवाई है। इससे छात्राओं को स्कूली शिक्षा के साथ-साथ सामान्य ज्ञान और देश दुनिया में होने वाली गतिविधियों के ज्ञान से भी अवगत कराया जाता है। ताकि आगे चलकर छात्राओं को कॉम्पिटिशन एग्जाम की तैयारी करने में मदद मिले।
शिक्षक की इस पहल से स्कूल में पढ़ने वाली छात्राएं भी काफी खुश है। छात्राओं का कहना है कि बस्ते के बोझ से छुटकारा मिलने से मानसिक थकान के साथ-साथ शारीरिक थकान से भी छुटकारा मिलने लगा है। इससे हमारी पढ़ाई में भी फायदा हो रहा है। अब हम सिर्फ जरूरी पुस्तक को ही घर ले जाते हैं। बाकी काफी और अन्य पुस्तक हम स्कूल के इन रैंक पर रखकर जाते हैं। इसका दूसरा फायदा यह भी है कि पुस्तकें खोने का डर भी नहीं रहता है और बारिश के दिनों में किताबों के भीगने का डर भी नहीं रहता है। इस बुक बैंक को लेकर छात्राओं में काफी उत्साह देखने को मिल रहा है।
जिले के कलेक्टर और शिक्षा प्रसार समिति के प्रभारी अपर कलेक्टर भी सरकारी शिक्षक की इस मुहिम को काफी सराय रहे हैं। जहां कलेक्टर एक और इस पैटर्न को जिले के अन्य स्कूलों में भी लागू करने की बात कह रहे हैं। वहीँ अपर कलेक्टर मॉडल क्लास के दिशा में शिक्षक का यह अनुकरणीय प्रयास बताते हुए उन्हें सम्मानित करने की बात कह रहे हैं।
