विदिशा। खराब फ़सलों के सर्वे के नाम पर किसानों के साथ क़ैदियों की तरह पट्टी थमाकर किए गए बर्ताव का तरीक़ा प्रशासन ने बदल दिया है। अब सर्वे ड्रोन से कराया जा रहा है। इलाकें में भारी बारिश के कारण फसलों को काफी नुकसान हुआ है। इसलिए मुआवजे एवं पारदर्शिता के लिए ड्रोन कैमरे से सर्वे किया जा रहा है।
दरअसल पिछले दिनों किसानों के गले में तख्ती डालकर सर्वे करने को लेकर विवाद हुआ था। इस मामले को लेकर विपक्ष ने सरकार पर जमकर हमला बोला था। जिसके बाद सरकार ने किसानों के गले में तख्ती डालकर सर्वे करने पर रोक लगा दी थी।
ऐसे में तहसीलदार ने सर्वे करने के नया तरीका अपनाया है। तहसीलदार यशवर्धन सिंह ने ग्यारसपुर के मालादेवी मंदिर की पहाड़ी से किसानों की खड़ी फसल एवं परती पड़ी जमीन की ड्रोन कैमरे से फोटो एवं वीडियोग्राफी करवाई।
तहसीलदार ने बताया कि ग्यारसपुर तहसील में कुल 28000 हजार हेक्टेयर में रकबा है। किसानों ने 25000 हजार हेक्टेयर में खरीफ की फसल बोई थी। इसमें से 18500 हेक्टेयर में फसलों को नुकसान हुआ है।
तहसीलदार ने बताया कि 30% से 50% नुकसान होने पर जिन किसानों के पास 2 हेक्टेयर से अधिक जमीन है उन्हें 6800 रुपए प्रति हेक्टेयर और जिन किसानों के पास 2 हेक्टेयर से कम जमीन है उन्हें 8000 रुपए प्रति हेक्टेयर मुआवजा राशि दी जाएगी।
वहीँ 50% से 100% नुकसान होने पर जिन किसानों के पास 2 हेक्टेयर से अधिक जमीन है उन्हें 16000 रुपए प्रति हेक्टेयर और जिन किसानों के पास 2 हेक्टेयर से कम जमीन है उन्हें 8000 रुपए प्रति हेक्टेयर मुआवजा राशि दी जाएगी।
इस साल विदिशा जिले में भारी बारिश होने से उड़द मूंग एवं सोयाबीन की फसलों को अधिक नुकसान हुआ है। ड्रोन कैमरे से फुर्तला, धूरेरा, उघर, कोटरा एवं ग्यारसपुर गाँव में बर्बाद फसलों का सर्वे किया गया है और इलाके के गाँवों में सर्वे जारी है।
