इंदौर। मध्य प्रदेश की सरकार ने प्रदेश के करीब साढ़े सात करोड़ लोगों को स्वास्थ्य का अधिकार मुहैया कराने के लिए राज्य स्तर पर कल्सल्टेशन आयोजित कर प्रारूप तैयार किया।राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 में स्वास्थ्य अधिकार कानून लाकर स्वास्थ्य को मौलिक अधिकार मानने की बात कही है । मध्य प्रदेश शासन अपने वचन पत्र के आधार स्वास्थ्य अधिकार कानून ला रही है।
सरकार के प्रारूप पर विभिन्न विभागों में समन्वय स्थापित करने के लिए बैठक तथा इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर में क्षेत्रीय कार्यशाला कर संभागीय स्तर के विभिन्न स्टेक होल्डर्स से सुझाव लिए गए।इन सुझावों को सरकार अब एक राष्ट्रीय संगोष्ठी में प्रस्तुत करेगी। स्वास्थ्य विभाग भोपाल की वंदना खरे एवं राजश्री बजाज ने बताया कि इसे लेकर सरकार गंभीर है और सभी प्रतिभागियों से लिखित में भी अपने सुझाव आमंत्रित किए गए।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता आनंद मोहन माथुर ने कहा कि आज के समय की जरुरत एक मजबूत स्वास्थ्य अधिकार कानून है और सरकार को इसी दिशा में विचार कर एक कानून पारित करना चाहिए । उन्होंने यह भी कहा कि दीपक फाउन्डेशन जैसी संस्थाओं को स्वास्थ्य सेवाओं की जिम्मेदारी देकर पिछली सरकार ने गरीबों के साथ अन्याय किया था ।
वरिष्ठ चिकित्सक डॉ भरत छापरवाल ने भी स्वास्थ्य अधिकार कानून का समर्थन करते हुए कहा कि एक अच्छा कानून ही लोगों को स्वास्थ्य सेवाएँ दे सकता है। उन्होंने बीमा आधारित स्वास्थ्य सेवाओं का विरोध किया ।
डॉ ज्योति बिंदल ने कहा कि स्वास्थ्य अधिकार कानून के लिए सभी विभागों के साथ समन्वय जरुरी है। उन्होंने मोहल्ला क्लिनिक जैसे प्रारूप को लाने की वकालत की । डॉ सविता इनामदार ने भी अपने उद्बोधन में जोर देकर कहा कि नीतियाँ तो बहुत बनी है परन्तु अभी आज एक कानून की महती जरुरत है।इंडियन मेडिकल असोसिएशन के डॉ दिलीप आचार्य ने कहा कि इन प्रयासों के साथ ही हमें तम्बाखू प्रतिबन्ध के बारे में बात करना चाहिए।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ अमूल्य निधि ने बताया कि जन स्वास्थ्य अभियान ने इस कानून में होने वाले प्रावधानों के बारे में विस्तृत सुझाव सरकार को दिए हैं,जिनमें मुख्य रूप से स्वास्थ्य अधिकार कानून लाने सहित स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाले विभिन्न कारक जैसे पानी, खाद्य सुरक्षा, पर्यवारण, सामाजिक सुरक्षा और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा एवं सबके लिए वहनशील व गरीबों को मुफ्त स्वास्थ्य सेवा अब कानून के दायरे में मुहैया कराई जाए। जन स्वास्थ्य अभियान सरकार की पहल का स्वागत करता है।
डॉ सुमित शुक्ला ने कहा है कि सरकार अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न देशों के अनुभव के आधार मध्य प्रदेश में एक मजबूत स्वास्थ्य अधिकार कानून बनाएगी। पर्यावरणीय स्वास्थ्य विशेषज्ञ सुश्री शमारुख धारा ने कहा की सभी सार्वजनिक एवं निजी स्वास्थ्य संस्थानों में सेवाओं का न्यूनतम मानक तय होना चाहिए।
वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल त्रिवेदी ने स्वास्थ्य अधिकार कानून को भारत के संविधान की मूल भावना बताया और कहा कि यह इज्जत के साथ जीवन के अधिकार से जुड़ा है। सामाजिक कार्यकर्ता राकेश चान्दौरे एवं डॉ संजय भालेराव ने कहा कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग द्वारा बनाये गए मरीजों के चार्टर को प्रस्तवित कानून में शामिल करना चाहिए।
सिलिकोसिस पीड़ित संघ के दिनेश रायसिंह ने कहा कि प्रदेश में व्यावसायिक स्वास्थ्य के लिए एक नीति होना चाहिए और प्रस्तावित कानून में विशेष रूप से इसे शामिल करना चाहिए ।मेडिकल ऑफिसर्स असोसिएशन के डॉ माधव हसानी ने कहा की 3 से 5 किलोमीटर में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं सभी को मिलनी चाहिए।
मुकेश सिन्हा ने कहा कि निजी अस्पतालों के लिए मध्य प्रदेश ड्राफ्ट क्लिनिकल एस्टेब्लिश्मेंट एक्ट 2019 को पारित कर प्रदेश में इसे विनियमित करे। यहाँ विभिन्न संस्थाओं, जन संगठनो के साथ सभी जिलों के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारीयों सहित क्षेत्रीय संचालक भी उपस्थित थे।
