धार। शहरों की तरह चमचमाता एक ऐसा गाँव जहाँ के सरकारी स्कूल में स्वीमिंग पुल है। गाँव की सरकारी आंगनवाड़ी में एयर कंडीशनर लगा है। एक कार्ड स्वेप करते ही आरओ वाला पीने का पानी मिल जाता है। इन तमाम सारी सुविधाओं से लैस शराब मुक्त यह गाँव अपने आदर्शों की एक अलग ही इबारत लिख रहा है।
धार जिले के नवादपुरा गाँव ने अपनी तकदीर खुद बदली है। इस गाँव में एक नहीं बल्कि कई सारी खूबियां हैं। आज से कुछ साल पहले तक नवादपुरा बाकी गाँवों की तरह अपनी किस्मत के रोने रो रहा था। आपको यह जानकर हैरानी होगी कि यह गाँव इलाके में शराब बनाने और बेचने के लिए बदनाम था लेकिन आज यह गाँव पूरी तरह शराब मुक्त है।
गाँव की सरकारी आंगनवाडी के बच्चे एयर कंडीशनर बिल्डिंग में अनार आम सीखते हैं। गांव के सरकारी स्कूल में गर्मियों के दिनों में बच्चे स्विमिंग पुल में उछल-कूद करते हैं। सडक पर गंदगी करने पर जुर्माना ठोंक दिया जाता। पीने के पानी का बंदोबस्त तो ऐसा है कि शायद हिन्दुस्तान के किसी बडे शहर में भी नहीं होगा। यहाँ पीने के पानी की मशीन लगी है, जहाँ दो रुपए में 20 लीटर पानी मिलता है। मशीन पर कार्ड चिपकाओ और आरओ का साफ़ सुधरा पानी घर ले जाओ।
करीब दो हजार की आबादी वाला नवादपुरा गाँव इलाके में पिंक विलेज यानी गुलाबी गाँव के नाम से भी जाना जाता है। यहां के मकानों का रंग गुलाबी है। गाँव में पक्की सडके और दीवारों पर सुंदर सुसज्जित चित्रकारियां हैं। दीवारों पर महापुरुषों और वीर शहीदों की तस्वीरों के साथ उनका परिचय लिखा गया है। इसका मकसद नई पीढियों में हमारे देश का महान इतिहास याद दिलाना है।
गाँव में चारों तरफ हरियाली है। गाँव के कांकड यानी सीमा से ही सडक के दोनों किनारों पर हरे-भरे पेड लहलहा रहे हैं। शहीदों का मंदिर, खेल का मैदान, सडकों के दोनों तरफ पेवर ब्लॉक और बडी-बडी डस्टबीन लगा रखी है।
यहां रहने वाले नौजवान कमल पटेल के पिता पेमाजी गाँव के उपसरपंच थे। पेमाजी गाँव को संवारना चाहते थे। वो इसे अपने सपना का गाँव बनाना चाहते थे। लेकिन अचानक वे चल बसे। पेमाजी के इसी सपने को पूरा कर रहे हैं उनके बेटे कमल पटेल।
नवादपुरा में और भी कई काम होना है जिसकी लंबी चौडी फेहरिश्त है। गाँव में जैविक यानी प्राकृतिक खेती और गायों को पालने पर जोर दिया जा रहा है।
