इंदौर। दीपावली के अगले दिन होने वाले प्राचीन हिंगोट युद्ध के लिए योद्धा तैयारी में जुट गए हैं। योद्धा पेड़ से हिंगोरिया नामक फल तोड़कर ला रहे हैं। इन फलों को छीलकर और उसका गुदा निकालते हैं। उसमें बारुद भर कर हिंगोट नामक अग्निबाण तैयार किए जाते हैं। इसकी तैयारी योद्धा नवरात्रि खत्म होते ही शुरू कर देते हैं।
दरअसल इंदौर जिले में देपालपुर के समीप गौतमपुरा में हर साल दीपावली के अगले दिन पड़वा की शाम को हिंगोट युद्ध होता है। युद्ध तुर्रा और कलगी नाम के दो दलों के बीच होता है। इसमें एक दल के योद्धा दूसरे दल के योद्धा पर हिंगोट से वार करते हैं। यह परंपरागत युद्ध सिर्फ भाईचारे का युद्ध होता है। इसमें किसी की हार या जीत नहीं होती है।
पूर्वजों द्वारा दी गई इस पारंपरिक धरोहर को जिन्दा रखने के लिए योद्धा एक महीने पहले से ही हिंगोट बनाने की प्रक्रिया में जुट जाते हैं। दीपावली के अगले दिन पड़वा को अपनी इस अद्वितीय परंपरा को जिवित रखते है। गौतमपुरा में यह परंपरा सदियों से चली आ रही हैं। इस युद्ध को देखने के लिए दूर-दूर से लोग पहुँचते हैं। इस पारंपरिक युद्ध में कई लोग चोटिल भी होते है परन्तु भाई चारे की तरह इसे सदियों से खेला जाता है। हिंगोट युद्ध में हर वर्ष नए योद्धा शामिल होते जाते हैं।
