इंदौर। भूरी बाई दसाना अपने गंभीर बीमार पति की चारपाई पर बैठ कर आंसू बहा रही है। उसका पति जगदीश कुछ महीने पहले तक भला चंगा था। वही कमाई करने वाला एक मात्र शख्स था। जगदीश को पहले खांसी हुई फिर बदन सूखने लगा। धीरे-धीरे उसकी हालत इतनी पतली होती गई कि दोनो हाथ-पैरों ने भी काम करना बंद कर दिया। अब तो उसकी आवाज भी चली गई है। भूरी बाई और जगदीश का भरा-पूरा परिवार है। छोटे बच्चे के अलावा साथ में बूढे माता-पिता भी रहते हैं। जगदीश के बिस्तर पकडने के बाद उसका छोटा सा बेटा चाय की दुकान पर कप धोकर थोड़े से पैसे कमा लाता है। जिससे जैसे-तैसे ही पेट भर पाता है।
जगदीश धार जिले के इंडस्ट्रियल इलाके पिथमपुर के तारपुरा गाँव में रहते हैं। उसके घर और गाँव से बमुश्किल 200 मीटर की दूरी पर रामकी इनवायर नाम का कारखाना है। जहां खतरनाक जहरीले कचरे का निपटान किया जाता है। यहां कुछ साल पहले भोपाल गैस कांड के बाद यूनियन कार्बाइड कारखाने से निकलने वाला कई टन कचरा भी लाया गया था। सेम्पल के तौर पर लाए गए कई टन इस कचरे को जमीन के भीतर दफना दिया है।
गाँव वालों का कहना है कि इस कचरे ने उनका जीना मुहाल कर दिया है। गाँव के बाहर बोकरेश्वर महादेव मंदिर से सटा एक सार्वजनिक कुंआ है। कुछ साल पहले तक पूरा गाँव इसी कुँए से पानी पीता था। रामकी इंडस्ट्री के कचरे की वजह से इलाके का ग्राउंड वाटर पूरी तरह से दूषित हो चुका है। गाँव के मोती सिंह का कहना है कि इस कचरे ने कुँए का पानी इस कदर खराब कर दिया है कि यह एसिड से भी ज्यादा जलने लगता है। अनजान होने की वजह से कई सालों तक इसी कुँए का पानी पीते रहे। बाद में पूरा गाँव गंभीर बीमारियों की चपेट में आ गया। अब तो हालत यह है कि यदि इस पानी में ऊंगलियां डाल दी जाए तो गल जाती है। कमोबेश यही हाल गाँव के दूसरे जलस्त्रोतों की भी है। कुँए और हेडपंप बंद कर दिए गए हैं। नगर पालिका पीथमपुर ने वैकल्पिक तौर पर यहां पानी की टंकियां और पाइप लाइन बिछाई है।
तारपुरा गाँव के मानसिंह बताते हैं कि दो हजार की आबादी वाले इस गाँव में 25 फीसदी से ज्यादा लोग गंभीर बीमारियों से पीड़ित हैं। रामकी इनवायर फैक्ट्री में जहरिले कचरे के बडे-बडे पहाड़ हैं। इससे जितने जमीन के उपर दिखाई देते हैं उतने ही जमीन के भीतर भी हैं। जब कचरे को जलाया जाता है तो इनसिनरेटर से निकलने वाला खतरनाक जहरील धुँआ हवा के प्रवाह के साथ गाँव की आबोहवा में जहर भर देता है। इसी धुँए और जहरीले पानी से गाँव के लोग परेशान हैं।
गाँव के गिरधारी मालवीय का कहना है कि हम कई बार फैक्ट्री बंद कराने के लिए आंदोलन कर चुके हैं। यहां हमारी सुध लेने वाला कोई नहीं है। हमें फैक्ट्री के भीतर भी नहीं घुसने दिया जाता। हम असहाय हैं।
गौरतलब है कि भोपाल गैस कांड दुनिया की सबसे भीषण त्रासदियों में से एक है। यूनियन कार्बाइड कारखाने के भीतर 346 टन जहरीला कचरा जमा है। इस कचरे के निपटान के लिए अभी तक कोई ठोस योजना या फिर क्रियान्वयन नहीं हुआ है। कुछ साल पहले करीब 30 टन कचरा पिथमपुर लाकर उसे जलाने की योजना बनाई गई थी। 30 टन कचरा ट्रकों में लादकर लाया भी गया लेकिन विरोध और इसके खतरनाक परिणामों से आशंकित होने के बाद फिलहाल इस कचरे को यूनियन कार्बाइड, भोपाल से उठाया नहीं गया है। जिस कचरे को रामकी एनवायर लाया गया है, उसके गंभीर नतीजे यहां देखने को मिल रहे हैं।
