मंडला। करीब डेढ़ साल पहले गाँव की 34 महिलाओं ने जंगल की रक्षा का वचन लिया था। हाथों में लाठियां थामकर महिलाएं वृक्षों की अवैध कटाई रोकने के लिए सड़कों पर उतर आई। महिलाओं के प्रयास से डेढ़ साल में 250 एकड़ से अधिक बंजर भूमि पर हरियाली छा गई है। महिलाओं के साहस से जहाँ एक तरफ जंगलों की कटाई पर रोक लगी है वहीँ वन्यप्राणी भी सुरक्षित है।
जल, जंगल, जमीन जीवन चक्र के लिए बेहद जरूरी है। यह बात जानते सभी है लेकिन इन्हें बचाने के लिए कम ही लोग आगे आते हैं। कान्हा नेशनल पार्क के जंगल से लगे गांवों की महिलाओं ने जुलाई 2018 में पर्यावरण बचाने का संकल्प लिया। बिरसा के कनिया समेत तीन गांवों की 34 महिलाएं सामूहिक रूप से वृक्षों की अवैध कटाई रोकने के लिए लाठियां थामकर सड़कों पर उतर आई है। वनों की रक्षा के लिए वनदेवी सुरक्षा समिति की ये महिलाएं आसपास के गांवों में पर्यावरण की सुरक्षा व संरक्षण का संदेश दे रही है।
दरअसल वन परिक्षेत्र बिरसा के ग्राम कनिया में वन विभाग की मदद से जुलाई 2018 में नया जंगल लगाया गया था। यहाँ पर औषधि वाले पौधे के साथ-साथ मिश्रित वृक्ष लगाए गए थे। आसपास के गांवों की 34 महिलाओं ने इसकी देखरेख का जिम्मा लिया। महिलाओं का समूह पिछले डेढ़ साल से यहां निगरानी कर रहा है। जंगल में कोई चोरी करता या नुकसान पहुंचाता पकड़ाता है तो उससे जुर्माना वसूला जाता है। इन महिलाओं की टुकड़ी का वन तस्कर और अवैध शिकार करने वाले लोगों के बीच भी खौफ पैदा हो गया है। यही नहीं इलाके में जंगल का दायरा भी बढ़ा है। पर्यावरण के संरक्षण और जंगल को बचाने का संदेश देती इन महिलाओं के साहसिक कदम की खूब सराहना हो रही है।
समूह की महिलाएं हाथों में लाठिया लेकर बारी-बारी से जंगलों को बचाने के लिए घूम-घूमकर पहरा देती है। समूह की महिलाओं का कहना है कि गांव में हरियाली बनी रहे इसीलिए समूह तैयार कर वनों की देखभाल करते है। पेड़ों को काटने पर जुर्माना लगाने का मकसद अवैध कटाई को रोकना है।
महिलाओं के द्वारा किया जा रहा प्रयास से वन विभाग को भी काफी मदद मिल रही है। समूह की महिलाओं ने 5-5 लोगों का ग्रुप बना लिया है जिनके द्वारा जंगल में गश्त की जाती है।
