मंडला। मध्यप्रदेश के मंडला में सिकल सेल एनिमिया गंभीर महामारी का रुप ले चुकी है। यहां हर तीसरा बच्चा इस बीमारी का शिकार है। इस बीमारी का कोई स्थायी इलाज नहीं है। बीमारी इतनी खतरनाक है कि इसका शिकार इंसान ना जी पाता है ना मर पाता है। हैरानी की बात ये है कि मंडला जैसे पिछडे इलाके में ये बीमारी डाइग्नोज ही नहीं हो पाती है। मंडला में इसे सामाजिक बुराई मानकर लोग छुपाते हैं। अभी तक यह साफ नहीं हो सका है कि आखिर मंडला में यह बीमारी क्यों पसर रही है। मंडला में लगे राहत-2 कैंप के बाद भोपाल एम्स अब इस इलाके में डेरा डाल कर रिसर्च और ट्रीटमेंट की शुरुआत कर रहा है। सिकल सेल एनिमिया होप टीम ने पिछले 15 दिनों में 175 मरीज खोज निकाले हैं। टीम ऐसे मरीजों में जागरुकता अभियान चला रहा है।
मंडला की टीचर और सोशल वर्कर श्यामलता झारिया के 18 साल के बेटे आर्यन को सिकल सेल एनिमिया है। श्यामलता पिछले 18 सालों से बेहद परेशानी के दौर से गुजर रही हैं। आर्यन 6 महीने का था तभी बेहद बीमार हो गया। इलाज के दौरान पता चला की उसके शरीर का खून खत्म हो गया है। सिकल सेल एनिमिया डाइग्नोज हुआ तो होश उड़ गए। तभी से शुरु हो गई संघर्ष की कहानी।
श्यामलता झारिया इस इलाके की अकेली ऐसी मां नहीं है जो अपने बेटे के साथ संघर्ष कर रही हैं। उनकी तरह औऱ भी कई लोग है। इलाके में सिकल सेल एनिमिया की बीमारी अपनी गहरी जड़े जमा चुकी हैं। मंडला में हर तीसरा-चौथा बच्चा इस गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं। श्यामलता का बेटा आर्यन इस बीमारी की वजह से स्कूल ही नहीं जा पाया। एक बार तो जिंदगी की डोर लगभग टूट ही गई थी। आर्यन कभी इतना बीमार हो जाता है कि उसे संभालना मुश्किल पड़ जाता है। वह बडे होकर बेहतर इंसान बनना चाहता है।
सिकल सेल बीमारी खून में अनुवांशिक गडबडी के कारण होती है। सिकल सेल में असामान्य हिमोग्लोबिन पाया जाता है। जिससे कोशिकाओं का आकार अर्धचंद्राकार हो जाता है। इससे लाल रक्त कोशिकाओँ की ऑक्सीजन वहन करने की क्षमता कम हो जाती है। कोशिकाएं नाजुक हो जाने से आरबीसी कम हो जाता है। जिससे एनिमिया यानी हर थोडे दिनों में खून की कमी हो जाती है। खून की कमी के कारण मरीज गंभीर बीमारियों की चपेट में आ जाता है। मंडला में कई लोग इसके शिकार हैं लेकिन यहां इसे सामाजिक बुराई का रुप मान लिया गया है। ऐसा माना जाता है कि बीमारी का पता चलने पर परिवार को अलग नजरिए से देखा जाएगा। पीड़ितों की शादियां नहीं हो पाएगी। इलाके में डॉक्टर्स की भी भारी कमी है। उपर से लोग अपनी बीमारियां बताते भी नहीं है।
सिकल सेल एनिमिया होप टीम पिछले 15 दिनों से मंडला में जागरुकता अभियान चला रही है। घर-घर जाकर मरीजों की पहचान के साथ उन्हें इलाज और उसकी सावधानियों को लेकर जागरुक किया जा रहा है। टीम ने पिछले 15 दिनों में 175 मरीजों की पहचान की है। बीमारी के डाइग्नोज नहीं होने और बीमारी छुपाने से सही आंकडें मौजूद नहीं है। जिले के कलेक्टर डॉ जगदीश चन्द्र जटिया भी सिकल सेल बीमीरी की गंभीरता से निपटने के लिए मुकम्मल बंदोबस्त जुटा रहे हैं।
पिछले दिनों 7 से 14 नवंबर तक मंडला में देश का सबसे बडा मेगा हेल्थ कैंप राहत-2 लगा था। इस कैंप में सिकल सेल एनिमिया एक महामारी के रुप में सामने आई थी। इसके बाद यहां भोपाल एम्स ने सिकल सेल पर काम करने के लिए अपनी सहमति दी। भोपाल एम्स यहां एक लेब शुरु की है। जिससे बीमारी डाइग्नोज होगी। साथ ही इसकी रिसर्च और ट्रीटमेंट पर भी काम शुरु किया जा रहा है।
आर्यन झारिया की तरह मंडला में हजारों लोग हैं जो सिकल सेल एनिमिया की वजह से बेहद परेशान है। बडा सवाल ये है कि आखिर इस इलाके में इस बीमारी की जडें क्यों फैल रही है। जरुरत इस पर भी काम करने की है।
