छिंदवाड़ा। आमतौर पर दरगाहों पर फूल और दान चढ़ाने का रिवाज होता है। लेकिन मध्य प्रदेश में एक दरगाह ऐसी है जहाँ फूल-दान नहीं बल्कि पत्थर चढ़ाए जाते हैं। यहाँ की परम्परा है कि अगर किसी का सामान खो जाता है या चोरी हो जाता है तो वह दरगाह पर उसके वजन का पत्थर चढ़ाता है। लोगों का विश्वास है कि इससे दो से तीन दिन में वह चीज वापस मिल जाती है। चीज वापस मिलने के बाद पत्थर के वजन के बराबर प्रसाद चढ़ाया जाता है।
छिंदवाड़ा शहर के बीचो-बीच छोटा इमामबाड़ा में अकबरी मस्जिद के प्रांगण में सितार वाले बाबा की दरगाह है। मान्यता यह है कि अगर किसी की कोई वस्तु गुम हो जाए तो यहाँ पत्थर चढ़ाने से वह तीन-चार दिन में मिल जाती है। यहाँ आने से किसी की कोई वस्तु मिल जाती है तो पत्थर के वजन के अनुसार प्रसाद चढ़ाता है।
सितार वाले बाबा की दरगाह कितनी पुरानी है ये कोई नही जानता। लोगों का विश्वास है कि यह सालों पुरानी है। यहाँ के किसी भी शख्स ने सितार वाले बाबा को नहीं देखा है। बाबा साहब पर आस्था रखने वाले शेख कलीम ने बताया कि बाबा की बहुत ही पुरानी दरगाह है। हम वर्षों से इसे देखते आ रहे हैं।
बाबा में आस्था रखने वाले छोटे खाँ बताते है कि बहुत साल पहले छिंदवाड़ा के लावाघोघरी थाना में पदस्थ टीआई की रिवाल्वर कही गिर गई थी। वो बहुत परेशान थे। टीआई को दरगाह में खोई हुई वस्तु मिल जाने की जानकारी मिली तो टीआई ने भी सितार वाले बाबा की दरगाह में एक पत्थर चढ़ाया। कुछ दिन बाद उन्हें खोई हुई रिवाल्वर मिल गई। उसके बाद टीआई ने मजार में रंगरोहन कर प्रसाद बांटा था।
बाबा साहब को मानने वाले लोगों का यह भी दावा है कि यहाँ किसी भी प्रकार की मन्नत मांगने से पूरी होती है। छिंदवाड़ा में यह दरगाह लोगो की आस्था बनी हुई है। इस दरगाह में लोग दूर-दूर से मन्नते मांगने यहा आते हैं। उनकी मन्नते पूरी होने पर प्रसाद चढ़ाते हैं।
