धार। हालातों से हारकर पढ़ाई छोड़ देने वाले बच्चों के लिए धार जिले की रहने वाली 13 वर्षीय मोनिका मावी मिसाल बनकर उभरी है। पिता की मौत, माता के छोड़ के चले से जाने और बुजुर्ग दादी-दादी की जिम्मेदारी भी मोनिका हौंसलों को तोड़ नहीं पाई। पांचवीं कक्षा में ही मजदूरी करने पर मजबूर हुई मोनिका आज धार के समीप ग्राम धरावरा में अपने भविष्य की नींव रख रही है। वह बड़े होकर नर्स बनना चाहती है ताकि अपने दादी-दादी की सेवा कर सके।
धार जिले के जीरापुरा गाँव की रहने वाली मोनिका के सिर से छोटी उम्र में ही पिता का साया उठ गया। मां दूसरी शादी करके चली गई थी। ऐसे में छोटी उम्र में ही मोनिका के ऊपर बुजुर्ग दादी-दादी की जिम्मेदारी आ गई। इसके लिए मोनिका पांचवी कक्षा से मजदूरी करने लगी। तभी उसे इस बात का अहसाह हुआ कि पढ़ाई करके ही जिन्दगी को संवारा जा सकता है। मोनिका को एक ऐसे स्कूल की जरुरत थी, जहाँ रहने की सुविधा भी हो। क्यों कि बुजुर्ग दादा-दादी के लिए मोनिका का ख्याल रखना संभव नहीं था।
ऐसे में मोनिका को गाँव की सहेली से धरावरा के कस्तूरबा गाँधी बालिका विद्यालय के बारे में पता चला। वैसे तो यहाँ प्रवेश लेने के लिए बालिकाओं को टेस्ट देना पड़ता है, लेकिन मोनिका की आर्थिक स्थिति को देखते हुए उसे सीधा प्रवेश दे दिया गया। यहाँ से उसकी उड़ान शुरू हुई जो अब तक जारी है। आज मोनिका आठवीं क्लास में पहुँच गई है। मोनिका का कहना है कि वह पढ़-लिखकर नर्स बनना चाहती है ताकि अपने दादा-दादी की बीमारी में मदद कर सके। मोनिका अपने गाँव की दूसरी लड़कियों को भी पढ़ाई के लिए प्रेरित करती है।
