देवास। देवास में एक ऐसा दस फीट गहरा प्राचीन कुंड है, जिसका पानी कभी खत्म नहीं होता। साल के 12 महीने इस कुंड में पानी भरा रहता है। कुंड में ना कभी पानी कम हुआ है और ना ही कभी खत्म हुआ। कुंड से करीब 20 फीट दूरी पर शिवलिंग विराजमान है। शिवलिंग के ठीक नीचे डेढ़ फीट का कुंड है जिसका जल भी कम नहीं होता है। इसकी खासियत यह है कि कुंड के जल से साल के बारह महीने और चौबीस घंटे शिवलिंग का जलाभिषेक होता है।
यह चमत्कारिक कुंड देवास जिले के हाटपिपलिया से आठ किलोमीटर दूर जूनापानी में जुनेश्वर महादेव मंदिर परिसर में स्थित है। श्रद्धालुओं का मानना है कि इस कुंड के दर्शन मात्र से ही मनोकामना पूरी हो जाती है। गांव के बुजुर्ग रामसिंह सैंधव बताते है कि पहले यहाँ ना कोई मंदिर था और ना ही प्रतिमा थी। करीब 300 साल पहले एक तपस्वी ने सालों तक यहाँ तपस्या की थी। जब गाँव वालों को तपस्वी के बारे में पता चला तो वह तपस्वी से मिलने पहुंचे।
तपस्वी ने गांव वालों से कहा कि इस जंगल में दस फ़ीट का गहरा कुंड दिख रहा है ये अपने आप में अद्भुत है। इसकी पूजा करो। तब से गाँव वालों ने अमावस्या और पूर्णिमा पर इसी कुंड पर स्नान करना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे इस स्थान की मान्यता बढ़ गई। बाद में ग्रामीणों ने जनसहयोग से यहाँ शिवमंदिर की स्थापना की। कुंड के अलावा जिस स्थान पर शिवलिंग मौजूद है, वहां तपस्वी ऋषि बाबा की प्रतिमा भी है।
ग्रामीण बलवान उदावत ने बताया कि लगभग 40 साल पहले आसपास के छह गांवों में पानी का अकाल था। तब इस कुंड के पानी ने ही छह गांवों के लोगों की प्यास बुझाई थी। इसके अलावा भी इस स्थान से कई किवदंतियां जुड़ी हुई है। यहां 2009 से लगातार पंच कुंडीय यज्ञ भी होता आ रहा है। इस कुंड को चमत्कार को देखते हुए ही गाँव के किसान कल्याण सिंह सैंधव, जीवन सिंह सैंधव, फूलसिंह सैंधव और चेतनसिंह सैधव ने अपनी जमीन दान में दी गई है।
