होशंगाबाद। इन दिनों किसान रासायनिक खेती को छोड़ जैविक खेती की तरफ बढ़ रहा है। होशंगाबाद के एक किसान ने जैविक पद्धति से तरबूज की खेती करने के लिए पांच एकड़ जमीन पर तरबूज की फसल लगाई है। इससे किसान को काफी फायदा भी हो रहा है।
दरअसल कई किसान अब पारंपरिक खेती से इतर अन्य चीजों की खेती कर रहे हैं। होशंगाबाद जिले के सिवनीमालवा के चापड़ा में रहने वाले किसान विश्वनाथ सिंह ने पांच एकड़ जमीन पर तरबूज की फसल लगाई है। इसके लिए किसान ने पूरे खेत में पन्नी बिछाकर तरबूज की बोनी कर ड्राप पद्धति से पानी दे रहा है। ड्राप पद्धति से पानी सीधे फसल की जड़ में पहुँचता है और इससे पानी की बचत होती है। किसान तरबूज की खेती पूरी तरह जैविक पद्धति कर रहा है। तरबूज की फसल को रासायनिक खाद नहीं बल्कि गोबर से बना खाद डाल रहा है।
तरबूज की खेती किसान को काफी फायदा हो रहा है। यह फसल तीन महीने में आ जाती है। इसका बीज जरुर महंगा होता है, लेकिन अन्य खर्च काफी कम होते हैं। इस पौधे पर 20 से 25 फल आते हैं। यह खाने में स्वादिष्ट होता है।
कृषि विभाग के अधिकारी ने बताया कि किसान अब पारंपरिक खेती को छोड़ गुलाब, तरबूज जैसी चीजों की भी खेती कर रहा है। इससे किसानों को काफी फायदा भी हो रहा है। अगर किसान आधुनिक ढंग से खेती करेंगे तो खेती लाभ का धंधा बन जाएगा।
