भोपाल। मध्य प्रदेश की कमलनाथ सरकार अपने एक फैसले के कारण विवादों में आ गई है। सरकार ने राज्य के स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को हर महीने 5 से 10 पुरुषों की नसबंदी कराने का आदेश दिया है। साथ ही लक्ष्य पूरा न करने पर ’नो पे, नो वर्क’ के आधार पर वेतन ना देने और अनिवार्य सेवानिवृत्ति देने का फरमान सुनाया है।
दरअसल राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण -4 की रिपोर्ट में सामने आया है कि मध्य प्रदेश में केवल 0.5 प्रतिशत पुरुषों के ही नसबंदी ऑपरेशन किए जा रहे हैं। इस रिपोर्ट का हवाला देते हुए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की संचालक छवि भारद्धाज ने सभी कलेक्टर और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों को पत्र लिखा है। पत्र में टार्गेट पूरा न करने वाले कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कदम उठाने की बात कही है।
सरकार के इस आदेश के बाद स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं ने विरोध करना शुरू कर दिया है। स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं का कहना है कि हम जिले में घर-घर जाकर अभियान तो चला सकते हैं, लेकिन किसी का जबर्दस्ती नसबंदी ऑपरेशन नहीं कर सकते है।
वहीँ भाजपा ने भी इस मामले को लेकर कमलनाथ सरकार पर हमला बोला है। पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ट्वीट किया कि, “मध्यप्रदेश में अघोषित आपातकाल है। क्या ये कांग्रेस का इमर्जेंसी पार्ट-2 है? एमपीएचडब्ल्यू (Male Multi Purpose Health Workers) के प्रयास में कमी हो, तो सरकार कार्रवाई करे, लेकिन लक्ष्य पूरे नहीं होने पर वेतन रोकना और सेवानिवृत्त करने का निर्णय, तानाशाही है।“
