रतलाम। रतलाम जिले में साढ़े चार सौ साल पुराने विरुपाक्ष महादेव मंदिर में 77वें पांच दिवसीय महारुद्र यज्ञ की पूर्णाहुति हुई। महारुद्र यज्ञ में संतान की चाह में हजारों की संख्या में महिलाएं शामिल हुई और खीर की प्रसादी ग्रहण की। यह सिलसिला दोपहर से देर शाम तक चलता रहा।
दरअसल रतलाम जिले के बिलपांक के भूल भुलैया और 64 खम्भों वाले विरुपाक्ष महादेव मंदिर में 77वें महारुद्र यज्ञ व तीन दिवसीय मेले का आयोजन किया गया। मान्यता है कि यहाँ बंटने वाली खीर की प्रसादी ग्रहण करने से निःसंतान महिला को संतान की प्राप्ति होती है। ऐसे में खीर प्रसादी ग्रहण करने और विरुपाक्ष महादेव के दर्शन करने के लिए देश के कोने कोने से महिलाएं 77वें महारुद्र यज्ञ में शामिल हुई।
बता दे कि विरुपाक्ष मंदिर में खंडित शिवलिंग की पूजा होती है। यहां आयोजित यज्ञ में आचार्य पंडित दुर्गाशंकर ओझा ने वैदिक मंत्रोच्चार किया। यज्ञ के मुख्य यजमान श्री विरुपाक्ष महादेव के पुजारी कमलेश तिवारी दंपत्ति ने रविवार को पूर्णाहुति दी। इस दौरान काफी संख्या में धर्मालु जन मौजूद थे और यज्ञ नारायण की जय के जयकारे लगा रहे थे। प्रतिवर्ष महाशिवरात्रि के अवसर पर यह यज्ञ होता है। महाशिवरात्रि पर यहां हजारों भक्तगण दर्शन करने आते है।
30,000 से अधिक महिलाओं का जमावड़ा
उल्लेखनीय है कि महारुद्र यज्ञ की पूर्णाहुति के पश्चात पुत्र की अभिलाषा रखने वाली महिलाओं को खीर की प्रसादी का वितरण किया जाता है। संतान की कामना में प्रसादी ग्रहण करने के लिए तकरीबन 30000 से अधिक महिलाएं पहुंची थी। महिलाओं के आने का क्रम देर शाम तक चलता रहा।
नि:संतान दंपति को संतान की चाह रखने की मन्नत कर खीर का प्रसाद लेने वाली ऐसी महिलाएं जिनकी मन्नत पूरी हुई, वह अपनी संतान के साथ यहां पहुंची। मन्नत पूरी होने पर महिलाओं ने अपनी संतान का तोल किया। यह तोल मिठाई गुड़ या अन्य वस्तुओं से होता है। जितना बच्चे का वजन होता है उतनी वस्तु मंदिर में चढ़ाई जाती है।
इस आयोजन में दो मुस्लिम महिलाएं भी अपनी संतान के साथ यहां तोल करने पहुंची थी। मंदिर समिति के अनुसार इन मुस्लिम महिलाओं ने पिछले साल खीर प्रसादी ग्रहण की थी। इन मुस्लिम महिलाओं ने यहां आकर भगवान विरुपाक्ष महादेव के दर्शन भी किए थे।
