पन्ना। मध्यप्रदेश के पन्ना जिले के अजयगढ़ तहसील में स्थित प्राचीन अजयपाल का किला आज भी अपने इतिहास और रहस्यों के कारण जाना जाता है। इस किले को लेकर कई किस्से कहानियां प्रचलित है। लोगों का मानना है कि किले में खजाना छिपा हुआ है लेकिन आज तक कोई उस खजाने को खोज नहीं पाया है।
वैसे तो पन्ना जिला ही ऐतिहासिक धरोहरों से भरा हुआ है लेकिन जिला मुख्यालय से 35 किलोमीटर दूर बसा अजयपाल का किला बहुत ही ऐतिहासिक है। किले का इतिहास कहता है कि यह किला दो हजार ईसा पूर्व चंदेल वंश के राजाओं के दौर का है। कहा यह भी जाता है कि जब औरंगजेब यहाँ आया था तब उसने किले में छिपे खजाने का पता करने के लिए किले में स्थित मंदिर की मूर्ती तोड़ने की कोशिश की, लेकिन मूर्ति पानी के कुंड में जाकर विलुप्त हो गई।
चंदेल राजाओं के इतिहास का बड़ा हिस्सा इसी किले के इर्द-गिर्द रहा है। किले में हर तरफ चंदेल राजाओं के सुनहरे दौर के अवशेष दिखाई देते हैं। अजयपाल का किला चंदेलों के 8 ऐतिहासिक किलों में से एक है। किले में अनेक ऐतिहासिक मूर्तियाँ भी है जैसे भगवान कार्तिकेय, भगवान गणेश, जैन तीर्थंकरों के आसन और अन्य। यहाँ एक शिलालेख भी है जिस पर अजयपाल के इस किले का रहस्य छिपा हुआ है। इस पर ताला चाबी की आकृति भी बनी है। हालाँकि अब तक कोई भी इस लिपि को पढ़ नहीं पाया है। इसलिए खजाने का रहस्य अभी तक बना हुआ है।
हर साल मकर संक्रांति पर स्थित भगवान अजयपाल की मूर्ति निकाली जाती है। इस मौके पर भगवान के दर्शन करने के लिए लाखों की संख्या में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। इस दौरान किले के नीचे ऐतिहासिक मेला भी लगाया जाता है। लोगों का मानना है कि अजयपाल की यह मूर्ति तांत्रिक बाबा की मूर्ति है। 2 दिन मेला लगने के बाद इस मूर्ति को रीवा स्थित पुरातत्व संग्रहालय में सुरक्षित रख दिया जाता है।
मान्यता है कि यहां भक्तों की हर मुराद पूरी होती है बशर्ते देवता के सामने खड़े होकर यह मुराद मांगी जाए। इस मंदिर में ऐसी मान्यता भी है कि यहां के एकमात्र कंकड़ को यदि पशु चिकित्सालय में रख दिया जाए तो वहां पर पशुओं की बीमारियां दूर हो जाती है।
