नरसिंहपुर। मध्य प्रदेश का एक गाँव ऐसा है जो आजादी के बाद से अब तक महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज के सपने को साकार करता नजर आ रहा है। इस गाँव में पंचायत का लोकतंत्र सियासत से नहीं बल्कि आपकी समझदारी से चल रहा है। गाँव का सरपंच मतदान से नहीं बल्कि ग्रामीणों द्वारा आपसी सहमती से चुना जाता है। आज यह गाँव ग्राम स्वराज का प्रतीक बनकर देश का सबसे आदर्श गाँव बनकर उभरा है।
महात्मा गांधी कहते थे कि लोकतंत्र का मतलब सिर्फ चुनाव लड़ना और उसे जीतना नहीं होता है बल्कि उसे निभाना होता है। नरसिंहपुर जिले का बघुवार गाँव गांधी के इन्ही आदर्शों पर चल रहा है। यहां के लोगों की एकता ने गाँव को सियासत की बुरी नजर से बचा लिया है। पूरे देश में जनप्रतिनिधि और सरकारें चुनाव के जरिए चुनी जाती हैं। चुनाव में जनता की गाढ़ी कमाई का करोड़ों रुपया पानी की तरह बहाया जाता है।
वहीँ बघुवार में आज तक पंचायत के चुनाव नहीं हुए यहां का लोकतंत्र सियासत से नहीं आपसी समझदारी से चलता है। गाँव के लोग मिल बैठकर आपसी सहमति से योग्य व्यक्ति को सरपंच और प्रतिनिधि चुनते हैं। यही इस गाँव के विकास का मूल सिद्धांत बन चुका है। ग्रामीण बताते हैं कि हमने अपनी आपसी जनभागीदारी से विकास कार्यों को अंजाम दिया है। लोग जहां सरकारी मदद के लिए टकटकी लगाए रहते हैं। वही बघुवार में सारे काम जनभागीदारी से संपन्न किए जाते हैं।
बघुवार में लोग स्वयं की प्रेरणा से स्वयं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए प्रयत्नशील रहते हैं। यही कारण है कि आज इस गाँव में अंडर ग्राउंड नालियां, वाटर हार्वेस्टिंग प्लांट, मानस भवन, गाँव संसद सामुदायिक स्त्री पुरुष शौचालय, स्नानघर, तालाब, बाग-बगीचे, जैविक आधारित खेती, वाटर रिचार्जिंग सिस्टम, समृद्ध स्कूल, गाँव की राशन दुकान, खुद का विद्युत सब स्टेशन इत्यादि उपलब्धियां हैं। यही वजह है कि खुद केंद्र सरकार ने इसे मॉडल प्रशिक्षण केंद्र घोषित कर देश भर से पंचायत प्रतिनिधियों को बघुवार के मॉडल समझने भेजा जाता है। ताकि वह अपने गाँव को भी इस मॉडल के अनुरूप विकसित कर सकें।
आज बघुवार के ग्राम स्वराज की प्रसिद्धि देश-प्रदेश ही नहीं बल्कि सात समंदर पार पहुँच चुकी है। यहाँ अमेरिका और कनाडा से भारतीय मूल के विदेशी ग्राम स्वराज की परिकल्पना के साकार स्वरूप को देखने और समझने नरसिंहपुर के बघुवार पहुंचते है और डाक्यूमेंट्री बनाकर उसे सम्पूर्ण विश्व के लिए आधार मानकर मॉडल के रूप में प्रस्तुत करने की मंशा रखते हैं।
ग्राम स्वराज की परिकल्पना को यह गाँव यूं ही साकार नहीं करता बल्कि संविधान के प्रति सच्ची निष्ठा और मौलिक अधिकारों के प्रति जागरूकता से ही यह गाँव उस मुकाम को हासिल कर सका है जिसका सपना कभी बापू ने देखा था। हर साल इस गाँव के ग्रामीण और आने वाली युवा पीढ़ी 26 नवम्बर को भारतीय संविधान के स्थापना दिवस पर संविधान की शपथ लेना नहीं भूलती और साथ ही मौलिक अधिकारों को भी याद रखती है।
भले की विकास की दौड़ में भारत अन्य देशों के पीछे हो पर भारत का यह 2000 आबादी वाला गाँव अपने आप में इतना समृद्ध और स्वावलम्बी है कि देश के बड़े बड़े शहरों को मात दे सकता है। पहले बघुवार गाँव भी अन्य गांवों की तरह सामान्य गाँव हुआ करता था लेकिन गाँव के विकास पुरुषों की अथक मेहनत और प्रयासों से इस गांवों ने जो तरक्की की वह अपने आप में मिसाल बन गई है।
