छिंदवाड़ा। इस बार बारिश के कारण किसानों को काफी नुकसान हुआ है। भारी बारिश का असर सफेद सोने के नाम से मशहूर कपास की फसल पर भी पड़ रहा है। खेतों में कपास के पेड़ तो नजर आ रहे हैं, लेकिन उन पर कपास फल नजर नहीं आ रहा है। कपास का उत्पादन कम होने से किसानों को नुकसान हो रहा हैं वहीँ दूसरी तरफ सरकार उन्हें फसल का उचित मूल्य दिलाने में नाकाम साबित हो रही है।
छिंदवाड़ा जिले के सौसर क्षेत्र का किसान इन दिनों दोहरी मार झेलने पर मजबूर है। बारिश के कारण पहले ही कपास की फसल को काफी नुकसान हुआ है, वहीँ व्यापारी भी कपास में गीलापन होने की बात कहकर कम दाम पर कपास की खरीदी कर रहे हैं। सौसर कृषि उपज मंडी में व्यापारी कपास को 4500 रुपये प्रति क्विंटल या उससे भी कम में खरीद रहे हैं। इससे किसान पूरी तरह से ठगा महसूस कर रहा है। वहीँ व्यापारियों का कहना है कि महाराष्ट्र की अपेक्षा मध्य प्रदेश में मंडी टैक्स तीन गुना है। इसलिए यहाँ किसानों को भाव कम मिल रहे हैं।
वहीं सौसर कृषि उपज मंडी बोर्ड के सचिव का कहना है कि सरकार के न्यूनतम रेट लगभग 5500 रुपये प्रति क्विंटल की दर से पर सीसीआई मंडी परिसर में व्यपारी द्वारा खरीदी करेंगी। हालाँकि सीसीआई भी 12 प्रतिशत से अधिक गीलापन होने पर कपास की खरीदी नही करेंगी। 8 प्रतिशत तक मोइश्चर पर कटौती की जाएंगी। लेकिन खरीदी कब होगी इसका कोई निश्चित समय नहीं है।
किसानों की शासन से मांग है कि पिछले साल कपास का मूल्य लगभग 6500 रुपये तक गया था। सीसीआई इस बार 7000 रुपए मूल्य निर्धारित कर ख़रीदी करे अन्यथा किसान की फसल के लागत मूल्य भी नही निकल पाएगा। देखना है किसान, व्यापारी व प्रशासन के खेल में क्या निर्णय हो पाता है।
