सिंगरौली। देश के विशालतम तापीय विजली परियाजना एनटीपीसी विंध्याचल का शाहपुर स्थित विशालकाय राख बांध रविवार की शाम अचानक ढह गया, जिससे तांडव मचाते राख मिश्रित बाढ़ बहते हुए सूर्या नाला गहिलगढ़ अमहवा टोला जुवाड़ी आदि गाँवों से बहते हुए रिहंद जलाशय की ओर तेज़ी से बह रहा है।
घटना की सूचना मिलते ही थाने के टीआई मनीष त्रिपाठी एवं एनटीपीसी के वरिष्ठ अधिकारी सदल बल मौके पर पहुंच गए। इससे आस-पास के रहवासियों में आक्रोश एवं भय का माहौल बना हुआ है।ग्रामीणों की माने तो चारागन के लिए गई अनगिनत गाय-भैंसें वापस लौटकर नहीं आई हैं। घटना स्थल पर भीड़ उमड़ पड़ी। टी आई मनीष त्रिपाठी ने बताया कि एनटीपीसी के राख बांध ढहने की घटना से कोई जनहानि नही हुई है परियोजना प्रबंधन एवं स्थानीय प्रशासन राहत कार्य में जुटा हुआ है
एनजीटीके याचिकाकर्ता जगतनारायण विश्वकर्मा का कहना कि एनटीपीसी प्रबंधन की लापरवाही और मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण की अनदेखी के चलते ऐश डैम टूटा है। इसका सबसे ज्यादा नुकसान रिहंद डैम को हुआ है। जिसका खमियाजा सोनभद्र के लोग भुगतेंगे।
इस राख में पारा,आर्सेनिक फ्लोराईड सीसा मिलने से रिहंद जलाशय प्रभावित होगा और उसका असर लाखो लोगो पर पड़ेगा।सोनभद्र के क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी राधेश्याम त्रिपाठी ने कहा है कि राख बांध के टूटने से सोनभद्र इलाके को भी बहुत ज्यादा पर्यावरणीय नुकसान हुआ है।एन जी टी में याचिकर्ता जगतनारायण विश्वकर्मा ने मांग की है कि जिमेदार अधिकारियों और एम पी बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी पर तत्काल कार्रवाई हो।
