रीवा। आज हम आपको ऐसी तस्वीर दिखाने जा रहे हैं जिन्हें देखकर आप विचलित हो सकते हैं। आस्था और विश्वास के नाम पर लोगों ने एक मोटी रॉड को अपने शरीर से आर-पार कर दिया। लोग इस जोखिम भरे करतब को देख कर हैरान रह गए। करतब करने वाले इसे माता का चमत्कार मानते हैं।
दरअसल दशहरे पर विंध्य क्षेत्र में ऐसे अनोखे करतब कई मौकों पर देखने को मिल जाते हैं। माता की भक्ति में लीन कई नौजवान अपने गाल को बाने से छेदकर उसमें नुकीली रॉड आर-पार कर जाते हैं। यह नजारा देखने वालों के रोंगटे खड़े हो जाते हैं। लेकिन भक्ति में डूबे इन युवकों को जरा सा भी दर्द का अहसास नहीं होता है।
रॉड को आरपार करने के लिए पहले गाल को बाने से छेदा जाता है। विंध्य क्षेत्र में शरीर पर बाना छेदने, अंगारो और नुकीले किलों पर चलने, ज्वारा और काली खप्पड़ खेलने की परम्परा कई वर्षो से चली आ रही है। लोग खुशहाली के लिए माता से मन्नत मांगते हैं। पूरी होने पर घर का मुखिया नवरात्रि में देवी को खुश करने के लिए व्रत रखता है और स्वेच्छानुसार अपनी आस्था से ली गई प्रतिज्ञा निभाता है।
आमतौर पर ये परंपराएँ आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र में ज्यादा होती है लेकिन रीवा में कई शिक्षित समुदाय के लोग भी ऐसे हैरत अंगेज कारनामें दिखाते है। जिला मुख्यालय से महज 20 किलोमीटर दूर महसाँव में चौरसिया परिवार के हर घर का एक सदस्य नवरात्रि में बाना छेद कर अपनी आस्था प्रकट करता है।
कुल देवी देवताओं की पूजा करने के बाद 8 से 10 फिट लम्बी लोहे की नुकीली रॉड से इन भक्तों के गाल छेद कर माता को खुश करने की परपंरा पीढी दर पीढी चली आ रही है।
