शिवपुरी। सरकार भले ही विस्थापितों को मुआवजा देने के लाख दावें करे लेकिन जमीनी हकीकत इससे उलट है। सुरवाया के आरक्षित वन से करीब 19 साल पहले विस्थापित किए गए परिवारों को आज तक मुआवजा नहीं मिला है। न ही इन्हें रहने के लिए घर या आजीविका चलाने के लिए खेती की भूमि मिली है।
दरअसल 19 साल पहले सुरवाया के आरक्षित वन से 100 सहरिया आदिवासी परिवारों को विस्थापित किया गया था। इनमें से 39 परिवारों को आज तक कोई मुआवजा, घर या खेती के ली जमीन नहीं मिली है। जबकि विस्थापन की शर्तों में ये सब सुविधाएं दी जाना जरूरी था।
इस सिलसिले में सामाजिक कार्यकर्ता अभय जैन का कहना है कि मानवाधिकार आयोग ने भी विस्थापन नीति के अनुसार जिला प्रशासन को शर्तें पालन करने की सिफारिश की थी। इस क्रम में तहसीलदार ने शर्तों को बिना पढ़े ऐसी रिपोर्ट बनाई है, मूर्खतापूर्ण है।
