आगर-मालवा। आगर-मालवा में अपने परिवार के साथ एक टूटे झोपड़े में रहने वाले एक मजदूर को सवा लाख रुपए का बिजली बिल आया है। भारी-भरकम बिल को देख जहाँ मजदूर परेशान हो गया है, वहीँ विद्युत मंडल के आला अधिकारी कह रहे है कि उपभोक्ता कार्यालय आकर मिले तब समझ आएगा कि मामला क्या है।
कमलनाथ सरकार भले ही गरीबों के हित में बिजली बिलों की माफी और कम से कम पैसे में बिजली बिल देने का दावा कर रही हैं। लेकिन आगर-मालवा के एक मजदूर का बिजली बिल सरकार के दावों को आईना दिखा रहा है। अपने परिवार के साथ एक टूटे झोपड़े में रहने वाले मजदूर देवीलाल को विद्युत मंडल ने 121529 रुपए का बिजली बिल थमा दिया। मजदूरी कर लोहा कूटने के बाद अपने परिवार के लिए दो वक्त की रोटी का जुगाड़ कर पाने वाले देवीलाल सवा लाख रुपए का बिजली बिल देख परेशान हो गए हैं। उन्हें यह समझ नहीं आ रहा है कि वह इस बिल का क्या करें।
बड़ी-बड़ी फैक्ट्रियां बड़े-बड़े उद्योगपतियों के भी इतने बिल नहीं आते मगर टूटी फूटी झोपड़ी में रहने वाले इस व्यक्ति का बिल लाखों रुपए का आया है। निश्चित रूप से देवीलाल को और उसकी बहू को इस बात का मलाल है कि एक तो शासन ने मकान तक नहीं दिया, ऊपर से ओडीएफ का दावा करने वाली केंद्र सरकार के सानिध्य में आज तक कोई शौचालय नहीं बना। इतना सितम कम नही था कि लाखों रुपए का बिजली बिल आ गए। प्रदेश सरकार बिजली के बिलों की माफी को लेकर कम से कम बिल देने की बात को लेकर वोट मांग लेती है और थमा आती है लाखों रुपए का बिल। ऐसे में गरीबों को शोषण उनकी आंखों में शासन की ठगी पर नमी ला देती है।
ऐसा नहीं है कि बिल केवल एक ही व्यक्ति को आया हो। कुछ दिन पहले क्षेत्र के ही एक और मजदूर रमेश को भी डेढ़ लाख रुपए का बिजली बिल मिला था। रमेश के बेटे ने बताया कि उसके पिता ने मध्य प्रदेश विद्युत मंडल के कई चक्कर लगाए तब जाकर शासन ने उसे सांत्वना दी कि तुम्हारा बिल धीरे-धीरे कम हो जाएगा। लेकिन इसके बाद भी रमेश को 22199 रुपए का बिल मिला। शासकीय महकमे का कहना है कि आपको इतना बिल तो भरना ही पड़ेगा। ऐसे में रमेश इस बात को लेकर हैरान है कि आखिर हमारा बिल इतना आता ही क्यों है? वह भी घर में एक बत्ती कनेक्शन जलाने के बाद। साफ है कि जब सरकार सो यूनिट माफ कर रही है। ऐसी स्थिति में लाखों रुपए का बिल मध्य प्रदेश सरकार और विद्युत मंडल को कटघरे में खड़ा करता है।
इस पूरे मामले में मध्य प्रदेश विद्युत मंडल के आला अधिकारियों ने भी कन्नी काटते हुए पूरा मामला उपभोक्ताओं पर ही ढोल दिया। अधिकारियों की माने तो जो उपभोक्ता अपने बिजली बिलों को लेकर परेशान हैं वह कार्यालय आकर मिले तब उनके बिलों को देखकर समझा जाएगा कि आखिर माजरा क्या है। विद्युत मंडल के अधिकारी ने यह भी बताया कि चुकी रीडिंग, मीटर फोटो के माध्यम से जाती हैं ऐसे में बिलो में गड़बड़ संभव है।
सरकार कोई भी हो कागजों में इनकी योजनाएं कुछ और होती है धरातल पर यह योजनाएं अलग ही तरह से काम करती है। देवीलाल और रमेश तो केवल उदाहरण हैं। ऐसे कई लोग हैं जिनके बिल हजारों रुपए में आए हैं और यह लोग विभागों के चक्कर काट-काट कर हैरान है। यहां तक कि इनके घरों से बिजली बंद कर मीटर को विभाग द्वारा ले जाया भी गया है और अब यह लोग इंतजार में है कि कब इनके बिजली बिल माफ हो कब इनके घर में फिर से बिजली आ सके।
