उमरिया। कृषि विभाग की आत्मा परियोजना से किसानों की जिन्दगी में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। किसान मशरूम उत्पादन से प्रति महिना पचास हजार से एक लाख रुपए की आय अर्जित कर रहे हैं। परंपरागत खेती से इतर मशरूम उत्पादन में किसानों को कम लागत और परिश्रम से ज्यादा आमदनी हो रही है।
दरअसल खेती को लाभ का धंधा बनाने और किसानों की आय दुगुनी करने के लिए राज्य सरकार का कृषि विभाग आत्मा परियोजना को लेकर लगातार प्रयास कर रहा है। कृषि विभाग के प्रयासों का उमरिया जैसे आदिवासी बाहुल्य जिलों में सकारात्मक असर देखने को मिल रहा है।
उमरिया जिले के ग्राम धौरई में दर्जन भर किसानों ने कृषि विभाग की आत्मा परियोजना की सलाह और मदद से मशरूम का उत्पादन शुरू किया। मशरूम उत्पादन ने किसानों की तकदीर बदल दी है। किसान अब खुद तो लाखों कमा ही रहे हैं और साथ ही किसानों को भी मशरूम उत्पादन से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास कर रहे हैं।
किसानों के अनुसार परंपरागत खेती में उन्हें जगह लागत और ज्यादा परिश्रम करना पड़ता है और आमदनी भी लागत के बराबर होती है। जबकि मशरूम उत्पादन से उन्हें जीरो लागत, थोड़ी बहुत देखभाल और कम जगह में ज्यादा मुनाफा मिलता है। लिहाजा किसानों को मशरूम उत्पादन ज्यादा रास आ रहा है। जिले के कृषि विभाग ने तीनों ब्लॉकों में लगभग डेढ़ सौ ऐसे किसानों को चिन्हित कर मशरूम उत्पादन की विधि का प्रशिक्षण और आवश्यक बीज संसाधन उपलब्ध कराएं हैं और सभी किसान मशरूम के उत्पादन से घर बैठे लाखो की आय अर्जित कर आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहे हैं।
