नरसिंहपुर। नरसिंहपुर जिले में सदियों से भूत मेला लगता आ रहा है। मेले में एक झाड़ू, एक घागे और तीन खंबे के चक्कर काटने से भूत भगाने का दावा किया जाता है। ख़ास बात यह है कि मेले में पूरे देश से तथाकथित प्रेत बाधाओं से जकड़े लोग आते हैं।
आज भले ही हम चांद पर आशियाने को तलाशने में जुटे हैं, लेकिन ग्रामीण भारत में आस्था और अंधविश्वास की जड़ें आज भी बहुत ही गहरी है। इसका प्रमाण देखने को मिलता है नरसिंहपुर के मारे गांव में हर वर्ष लगने वाले भूत मेले में। साधु संतों की समाधि पर लगने वाले इस मेले में हजारों की संख्या में जनमानस उमड़ता है। दूसरे मेलों की तरह यहाँ भी लोग खरीदारी करने के लिए पहुँचते हैं। लेकिन इसके इतर मेले में बड़ी संख्या में तथाकथित प्रेत बाधाओं से जकड़े लोग भी आते हैं। पीड़ित को समाधि पर लाया जाता है। यहाँ बुजुर्ग पुजारी द्वारा झाड़ फूंक करने के बाद पीड़ित से वहां मौजूद खंबे के चक्कर लगवाए जाते हैं। इसके बाद पीड़ित और उसके परिजनों के गले में रक्षा सूत्र बांधा जाता है। पीड़ितों का दावा है कि इससे उन्हें परेशानी से निजात मिलती है।
भले ही विज्ञान भूत प्रेत और अन्य बाधाओं को नहीं मानता। लेकिन मेले में आने वाले पीड़ितों का दावा है कि उन्हें यहाँ आकर आराम मिला है। अब यह अंधविश्वास है या लोगों की आस्था पर भरोसा, लेकिन यहाँ आने वाले भक्तों को भगवान के चमत्कार पर पूरा भरोसा है।
कहा जाता है कि जिस व्यक्ति को भूत प्रेत और अन्य प्रकार की प्रेत आत्माएं परेशान करती हैं। उन्हें यहाँ खंबे से चिपकाया जाता है। खंबे से चिपकने के बाद सारी भूत प्रेत आत्माएं खंबे में ही चिपक कर रह जाती हैं और पीड़ित को भूत प्रेत जैसी बाधाओं से निजात मिलती। नरसिंहपुर में यह मेला लगभग 500 सालों से चलता आ रहा है।
