इंदौर। घर की आर्थिक परेशानियों से उबरने के लिए इंदौर आई किरण (परिवर्तित नाम) की कहानी उन लड़कियों के लिए मिसाल है जो चुपचाप अपने ऊपर हो रहे अत्याचारों को सहती रहती है। कई बार रेप, धोखाधड़ी और मारपीट जैसी घिनौनी वारदातें हुई लेकिन किरण ने हार नहीं मानी। आज किरण अपने साथ हुए अत्याचारों से लड़ भी रही है और साथ ही बच्चों को सेल्फ डिफेंस सिखाकर ज़िंदगी की नई राह दिखा रही है। यही नहीं किरण सेल्फ डिफेन्स के साथ पढ़-लिखकर अक्षरों से भी वाकिफ हो रही है।
बुंदेलखंड के ललितपुर की रहने वाली किरण की पारिवारिक स्थिति ठीक नहीं थी। 16 साल की उम्र में काम की तलाश में किरण अपनी बहन के साथ इंदौर आई। किरण यहाँ एक बड़ी कॉलोनी के घरों में खाना बनाकर अपना गुजर-बसर करने लगी। इस दौरान बहन के घर में उसको लेकर होने वाले झगड़ों से बचने के लिए किरण अपने भाई के साथ किराए के कमरे में रहने लगी। एक दिन मकान मालिक के बेटे मनोज ने मौका देखकर उसके साथ दुष्कर्म किया।
किरण ने यह बात मनोज के घर वालों को बताई तो उन्होंने मामले को दबाने के लिए बालिग होने पर दोनों की शादी कराने का झांसा दिया। किरण के घर वाले भी इस बात पर सहमत हो गए। करीब दो साल तक आरोपी परिवार ने किरण को बहु की तरह रखा। इस दौरान मनोज ने शादी का झांसा देकर उसके साथ कई बार संबंध बनाए। जब किरण 18 वर्ष की हुई और उसने शादी करने की बात कही तो मनोज और उसके परिवार वालों ने शादी करने से मना कर दिया।
किरण ने पूरी कहानी एक महिला को बताई जिसके यहाँ वह काम करती थी। महिला के समझाने पर किरण ने इंदौर के लसूड़िया थाने में मनोज के खिलाफ केस दर्ज कराया। शुरुआत में तो पुलिस ने केस दर्ज करने से मना कर दिया लेकिन जब बात मीडिया तक पहुंची तो पुलिस ने केस दर्ज कर लिया। केस दर्ज कराने के बाद किरण वापस अपने गाँव चली गई। दूसरी तरफ केस दर्ज होने पर मनोज किरण के गाँव पहुँच गया और उसके परिवार वालों पर शादी का दबाव बनाया। समाज के डर से किरण के घर वालों ने उसकी शादी मनोज से करवा दी।
शादी के कुछ दिनों बाद ही मनोज किरण के साथ मारपीट कनरे लगा। अपने दोस्तों में उसका नंबर बाटकर अश्लील बातें करता था। इन सब से परेशान किरण मायके से भाग आई। लेकिन किरण के घर वालों और समाज वालों ने ही उसका साथ नहीं दिया। सभी किरण को वापस ससुराल लौट जाने की सलाह देते रहे। कहीं से भी मदद न मिलती देख किरण ने चाइल्ड लाइन से संपर्क कर अपनी परेशानी बताई। यहाँ किरण की बातें सुनी गई और उसे और हर तरह की सहायता उपलब्ध कराई गई। अब किरण यहाँ पढ़ाई के साथ सेल्फ डिफेंस की ट्रेनिंग ले रही है। बुधवार को किरण को ब्लू बेल्ट मिला है। एनजीओ द्वारा किरण को कानूनी मदद के साथ साथ घर और भोजन की व्यवस्था कराई गई है। अब सरकारी वकील द्वारा किरण का केस लड़ा जा रहा है। किरण कराटे की कॉम्पटिशन में कई मेडल जीत चुकी है। वह चाइल्ड लाइन में ही बच्चों को आत्मरक्षा के गुर भी सिखा रही है। किरण यहाँ पूरी बहादुरी के साथ अपना केस लड़कर एक अच्छे भविष्य की नीव रख रही है।
हालाँकि किरण की कहानी से हमारी सामाजिक और न्याय व्यवस्था पर कई सवाल भी खड़े होते हैं। आखिर कब तक बुंदेलखंड की लड़कियां पढ़ाई-लिखाई में पिछड़कर इस तरह के अपराधों का सामना करती रहेंगी? आखिर समाज कब तक दुष्कर्म पीड़िता के साथ ही अपराधी की तरह व्यवहार करता रहेगा?
