आगर-मालवा। प्रदेश का एक ऐसा अनोखा मंदिर जहाँ भगवान को जंजीरों में कैद करके रखा जाता है। भगवान के आगे एक खजूर का पेड़ लगा दिया है ताकि भगवान मंदिर के बाहर न आ सके। लोगों की मान्यता है कि भगवान अगर मंदिर से बाहर आ गए तो उत्पात मचाएंगे।
यह अनोखा केवड़ा स्वामी मंदिर आगर-मालवा में स्थित है। अपनी भिन्नताएँ, विशेषताओं और मान्यताओं के कारण यह मंदिर पूरे भारत में प्रसिद्ध है। भैरव महाराज को समर्पित इस मंदिर का इतिहास काफी पुराना है। मान्यता है कि किसी समय राजपूत परिवार के कुछ लोग अपने भैरव महाराज को गुजरात से लेकर कहीं जा रहे थे। लेकिन इस स्थान पर आकर उनका चक्का थम गया और भैरव महाराज यहीं बस गए।
जानकारों का कहना है कि यहाँ बसने के बाद भैरव महाराज बच्चों का रूप लेकर शहर में अन्य बच्चों के साथ खेला करते थे। कुछ देर खेलने के बाद बाल रूप भैरव उदडंग मचा दिया करते थे। वह बच्चों के साथ मारपीट और अन्य तरीकों से लोगों को परेशान किया करते थे। इस कारण जानकारों ने भैरव मंदिर के आगे एक खजूर का पेड़ लगा दिया। यह पेड़ उन्हें मंदिर के बाहर आने से रोकने का प्रयास था। साथ ही भगवान भैरव को जंजीरों से भी बंधा गया है ताकि वह बाहर आकर लोगों को परेशान न करे।
केवड़ा स्वामी मंदिर आगर मालवा के सबसे बड़े तालाब मोती सागर के समीप स्थित है। मंदिर के समीप केवड़े के फूलों का शानदार बगीचा है। केवड़े का बगीचा मंदिर की शोभा और भी अधिक बढ़ाता है। यहां केवड़े की खुशबू आती रहती है और इतने अधिक मात्रा में केवड़े होने के कारण मंदिर का नाम भी केवड़ा स्वामी पड़ा गया।
लोग यहां केवड़ा स्वामी के नाम से ही भैरव महाराज के मंदिर को जानते हैं। भारत के कोने-कोने से श्रद्धालु यहाँ आकर भगवान का आशीर्वाद लेते हैं। प्रतिवर्ष भैरव पूजनीय पूर्णिमा पर काफी मात्रा में यहां दर्शनार्थी आते हैं। यह दर्शनार्थी मंदिर परिसर में ही दाल बाटी बनाते हैं और भगवान को भोग लगाते हैं।
भैरव महाराज के मंदिर में दूल्हे-दुल्हन की भी काफी भीड़ दिखाई देती है। जिन भी परिवार के कुल भैरव है वह अपने नव विवाहित बच्चों को यहां आशीर्वाद दिलवाने के लिए जरूर लाते हैं। केवड़ा स्वामी मंदिर में भक्तों का तांता लगा रहता है। यहां ऐसा भी कहा जाता है कि जो महिला अपने बच्चे को जन्म देने के बाद उसे दूध नहीं पिला पाती यहां के पानी को अपने आंचल पर लगाने के बाद मां को दूध आने लगता है।
भैरव महाराज की इन विशेषताओं के चलते देशभर में भगवान के प्रति आस्था का भाव दिखाई देता है। लोग यहां भगवान को पूजने के लिए काफी संख्या में आते हैं। मंदिर परिसर में भगवान भैरव उत्पात ना बचा सके इसी वजह से खजूर के पेड़ और जंजीरों से भगवान को रोकने वाला दृश्य स्पष्ट दिखाई देता है।
