धार/बड़वानी। पिछले कुछ दिनों में सरदार सरोवर बांध से प्रभावित नर्मदा घाटी के जलस्तर में करीब चार मीटर की कमी आई है। बैकवाटर में डूबे पेड़, मकान और खेत अब बाहर आने लगे हैं। गांवों से पलायन कर चुके लोग वापस अपने गाँव को देखने के लिए पहुँच रहे हैं। वहीँ सरकारी टीम भी डूब प्रभावित गांवों का दौरा कर रही है। टीम विस्थापितों से उनकी समस्याओं को लेकर भी बातचीत कर रही है।
दरअसल नर्मदा बचाओ आंदोलन के नेताओं द्वारा भोपाल में धरना प्रदर्शन के बाद कमलनाथ सरकार ने एक कमेटी बनाकर डूब क्षेत्रों की हकीक़त पता करने के लिए भेजी है। इंजीनियर इन चीफ एनवीडीए भोपाल राजीव कुमार सुकलीकर को कमेटी का अध्यक्ष बनाकर भेजा गया है। यह कमेटी डूब प्रभावित गांवों का दौरा कर रही है। इस दौरान ऐसे कई क्षेत्र सामने आए जिन्हें डूब से बाहर बताया था लेकिन जमीन डूब गई। ऐसे लोगों को मुआवजा भी नहीं मिला।
जांगरवा में जिन मकानों को डूब से बाहर बताया था वह डूब चुके हैं। अफसरों ने इन सभी का जायजा लिया। इसके अलावा अधिकारियों ने डूब प्रभावितों के साथ बैठक कर उनकी समस्याएं सुनी। प्रभावितों ने उन्हें बताया कि बिना पुनर्वास किए गांव को डुबाया गया है और कई लोगों को मुआवजा भी नहीं दिया गया। वहीँ विस्थापितों ने बताया कि पुनर्वास स्थलों पर स्ट्रीट लाइट, पेयजल व नाली की सुविधा नहीं है।
