देवास/खंडवा। ओंकारेश्वर बांध में लगातार बढते जलस्तर से प्रभावित इलाकों रहने वालों की सांसे थमी हुई है। बीते 9 दिनों से पानी के भीतर खडे रहकर प्रभावित लोग जलसत्याग्रह कर रहे हैं। सत्याग्रहियों की चमडी उखड रही है, खून का रिसाव हो रहा है मगर मदमस्त सरकार पसीज नहीं रही। आखिर क्यों इतना कठोर आंदोलन करने पर मजबूर हैं लोग? कई परिवार ऐसे है जिन्हें मुआवजे के नाम पर फूटी कोडी नहीं मिली मगर उन्हें डंडे के दम पर खदेडा जा रहा है। बाँध के पानी ने गाँवों और खेतों के बीच रास्ता रोक दिया है।
देवास जिले का प्रसिद्ध तीर्थ स्थल धाराजी टापू में तब्दील हो चूका है। धाराजी का मनमोहक जलप्रपात ओंकारेश्वर बांध के जलाशय में डूब चुका है। अब यहां फटकने पर भी पुलिस की पाबंदी है। सरकार ने यहां बने मकानों और धर्मशालाओं को तोड़ दिया है। स्कूल और बिजली पहले ही छीन ली गई। लेकिन हैरानी की बात ये है कि यहां अभी भी करीब 9 परिवार रह रहे हैं। धाराजी के रामकरण और समोता बाई का दावा है कि इन्हें पुनर्वास की सूची में शामिल कर धारा 4 को नोटिस तो दिया गया था लेकिन आज तक फूटी कोडी तक नहीं दी गई। अब डूबने और मरने के अलावा इनके पास कोई चारा नहीं है।
एक अन्य प्रभावित गाँव है कोथमिर। यहां के लोगों के पास छोटी-छोटी खेती के अलावा रोजगार का कोई धंधा नहीं है। गाँव के 40 से ज्यादा परिवारों के खेत टापू में तब्दिल हो गए हैं। धूमा बाई बताती है कि नाव किराए पर लेकर हर दिन खेतों पर जाना पड़ता है। यहाँ जाना किसी बड़े जोखिम से कम नहीं है। दिन भर में तीन चार बार पानी को पार कर खेतों में जाना आना पड़ता है। हमारी जमीन टापू में तब्दील हो गई है। अभी तक हमें इस जमीन का मुआवजा नहीं मिला है। खेती नहीं करेंगे तो खाएँगे क्या? इसी गाँव के धनसिंह बताते हैं कि इस पानी में कुछ दिन पहले नाव पलट जाने से हादसा घट गया था। गनिमत रही कि किसी की जान नहीं गई।
तमाम सारे गाँवों में रहने वाले लोग इस विकास की कीमत अपना विनाश कर चुका रहे हैं। बांध का पानी 196.6 मीटर तक भरा जाना है। पानी हर दिन लोगों को डरा रह है। बड़ा सवाल ये है कि क्या बडी-बडी पुनर्वास नीतियों की हकीकत इसी तरह देखी जाती रहेगी।
