भोपाल। मध्यप्रदेश के सियासी संकट को लेकर शिवराज सिंह चौहान सहित 10 भाजपा विधायकों की याचिका पर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में करीब चार घंटे तक सुनवाई चली। सुप्रीम कोर्ट में कांग्रेस, भाजपा, राज्यपाल, स्पीकर और बागी विधायकों की ओर से 5 वकीलों ने दलीलें पेश कीं। अब मामले की सुनवाई गुरुवार सुबह 10:30 बजे होगी।
सुप्रीम कोर्ट में कांग्रेस ने राज्यपाल के निर्देशों पर सवाल उठाए और भाजपा पर साजिश करने का आरोप लगाया। कांग्रेस ने कहा कि राज्यपाल रातों रात मुख्यमंत्री और स्पीकर को बहुमत परीक्षण का आदेश नहीं दे सकते। यह स्पीकर का काम है। राज्यपाल उन पर हावी हो रहे हैं। इस दौरान कांग्रेस ने कहा कि विधायकों के इस्तीफे से खाली हुई सीटों पर उपचुनाव होने तक फ्लोर टेस्ट नहीं कराया जाए, जबकि भाजपा ने इसका विरोध किया।
वहीँ बागी विधायकों के इस्तीफे को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने स्पीकर से पूछा कि विधायकों के इस्तीफे पर अभी तक फैसला क्यों नहीं लिया? क्या ये विधायक अपने आप अयोग्य नहीं हो जाएंगे? अगर आप संतुष्ट नहीं हैं, तो आप विधायकों के इस्तीफे को अस्वीकार कर सकते हैं। कोर्ट ने कहा कि 16 बागी विधायक फ्लोर टेस्ट में शामिल हों या नहीं, लेकिन उन्हें बंधक नहीं रखा जा सकता।
इस पर बागी विधायकों के वकील ने कहा कि कमलनाथ से विधायक नहीं मिलना चाहते हैं। स्पीकर को विधायकों के इस्तीफे मंजूर करने का निर्देश दिया जाए। इसके बाद जज ने कमलनाथ के वकील कपिल सिब्बल से कहा कि हम विधायकों से मिलने का आदेश नहीं दे सकते हैं। यह बच्चों का मामला नहीं हैं।
